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    सोमवार, 10 जुलाई 2017

    मानसून की पहली बारिश ....रात भर बूंदे झरती रहीं--कजरी का आनंद

    मानसून की पहली बारिश ....रात भर बूंदे झरती रहीं ...पानी का झर्रा बालकनी से कमरे में जानबूझ कर आ रहा था ...सावन की आहट ... एक कजरी का लिखना तो तय था ..ये अलग धुन में तैयार किया है ...आनंद लीजियेगा ...
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    लागि झूमि झूमि बरसे बदरिया,
    आए ना संवरिया ना।
    कारी कारी घटा छाई
    चारउ ओर अन्हराई
    चारउ ओर अन्हराई-२
    रतिया लागे अइसे जइसे मोर सवतिया,
    केहसे बोली बतिया ना।
    दईव जोर जोर गरजा
    कांपे लागे हो करेजा
    कांपे लागे हो करेजा-२
    परलय होई आज गिरता बिजुरिया,
    हीले मोर बखरिया ना।
    जमुना बाढ़े भरिके पानी
    राम कईसे हम जुड़ानी
    राम कईसे हम जुड़ानी-२
    सुग्गा बोले जाने कऊन से नगरिया,
    मिले ना खबरिया ना।
    ...डॉ पवन विजय
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    Item Reviewed: मानसून की पहली बारिश ....रात भर बूंदे झरती रहीं--कजरी का आनंद Rating: 5 Reviewed By: S.M.Masoom
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