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    शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

    किसानो का दुश्मन बन गई है नीलगाये

    उत्तर प्रदेश   के किसानो का जानी दुश्मन बनती जा रही है नीलगाय |  नीलगाय एक बड़ा और शक्तिशाली जानवर है। कद में नर नीलगाय घोड़े जितना होता है, पर उसके शरीर की बनावट घोड़े के समान संतुलित नहीं होती। पृष्ठ भाग अग्रभाग से कम ऊंचा होने से दौड़ते समय यह अत्यंत अटपटा लगता है। अन्य मृगों की तेज चाल भी उसे प्राप्त नहीं है। इसलिए वह बाघ, तेंदुए और सोनकुत्तों का आसानी से शिकार हो जाता है, यद्यपि एक बड़े नर को मारना बाघ के लिए भी आसान नहीं होता। छौनों को लकड़बग्घे और गीदड़ उठा ले जाते हैं। परंतु कई बार उसके रहने के खुले, शुष्क प्रदेशों में उसे किसी भी परभक्षी से डरना नहीं पड़ता क्योंकि वह बिना पानी पिए बहुत दिनों तक रह सकता है, जबकि परभक्षी जीवों को रोज पानी पीना पड़ता है। इसलिए परभक्षी ऐसे शुष्क प्रदेशों में कम ही जाते हैं।

    वास्तव में "नीलगाय" इस प्राणी के लिए उतना सार्थक नाम नहीं है क्योंकि मादाएं भूरे रंग की होती हैं। नीलापन वयस्क नर के रंग में पाया जाता है। वह लोहे के समान सलेटी रंग का अथवा धूसर नीले रंग का शानदार जानवर होता है। उसके आगे के पैर पिछले पैर से अधिक लंबे और बलिष्ठ होते हैं, जिससे उसकी पीठ पीछे की तरफ ढलुआं होती है। नर और मादा में गर्दन पर अयाल होता है। नरों की गर्दन पर सफेद बालों का एक लंबा और सघन गुच्छा रहता है और उसके पैरों पर घुटनों के नीचे एक सफेद पट्टी होती है। नर की नाक से पूंछ के सिरे तक की लंबाई लगभग ढाई मीटर और कंधे तक की ऊंचाई लगभग डेढ़ मीटर होती है। उसका वजन 250 किलो तक होता है। मादाएं कुछ छोटी होती हैं। केवल नरों में छोटे, नुकीले सींग होते हैं जो लगभग 20 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। नीलगाय (मादा) नीलगाय भारत में पाई जानेवाली मृग जातियों में सबसे बड़ी है।


    किसान अपने खून पसीने सिचकर फसलो को उगाते है उधर नीलगाये झुण्ड में धावा बोलकर पल भर में चट कर जाती है जो बच गई उन्हें पैरो तलों रौद डालते है ऐसी परिस्थिति में किसान भुखमरी की कगार पर पहुच गये है|
    किसान जितनी मेहनत और पैसा  फसलो को उगाने में लगाते है उससे कही जादा नीलगायो से बचाने में लगा रहे है हालत ये हो गये है कि दिनभर किसान खेतो में मेहनत करते है रातभर उनकी रखवाली करते है इसके बावजूद भी पल झपकते है नीलगायो का झुण्ड किसानो कि सारी मेहनत को आपना निवाला बनालेती है किसान बेचारे हाथ मलते रहजाते है.





    Jaunpur Neel gae


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    7 comments:

    1. इस समस्या के जनक हम स्वयं हैं. नील गायों को दोषी मानना अनुचित प्रतीत होता है.

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    2. सचमुच बडी समस्‍या है। पर इसपर कोई ध्‍यान नहीं दे रहा है और किसान रो रहे हैं।

      ---------
      मौलवी और पंडित घुमाते रहे...
      सीधे सच्‍चे लोग सदा दिल में उतर जाते हैं।

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    3. किसान भी तो जहां देखो वहीं किसानी करने लगे। नीलगायों के लिए रहने-बसने की कोई जगह ही नहीं छोड़ी।
      क्या इस धरती पर केवल इंसान ही बसेगा ?
      नहीं हो रही है तो न हो खेती।
      दूसरी जगह से आ जाएगा खाने के लिए।
      हमारे देश में ऐसी बहुत सी जगह हैं जहां पर नील गाय नहीं होती हैं और अगर होती भी हैं तो वहां जाती नहीं हैं और अगर चली जाएं तो फिर वापस आती नहीं हैं।
      वैसे भी यह घोड़ा प्रजाति का जीव है।
      गाय की तरह इसका खुर फटा हुआ नहीं होता है।
      हमारे मामा की खेती को नीलघोड़ों का झुंड आंख उठाकर देखता तक नहीं।

      http://ancient-ayurveda.blogspot.com/

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    4. Neel Gai is not any type of Cow, but horse. Govt. should kill all of them & maybe export its meat to Gulf Countries & get FREE Petrol in exchange.

      Any better suggestions, post here.

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    5. नील गाय का बढ़ना बहुत ही चिंता जनक है इस क्षेत्र के किसानों का सरदर्द बन गया है ये गाय है या घोडा है जटिल मुद्दा है इस पर बहस न कर खेती बचाया जाये इन्हें पकड़ पकड़ कर किसी जंगल में छोड़ा जाये वन बिभाग इस की प्रजाति को बचाए वहीँ
      भ्रमर ५

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    6. नीलगाय से खेतो को बचने केक साधारण एवं सरल उपाय ....
      नीलगाय के गोबर को कोल्लेक्ट कर उसमे देसे गे का गो मूत्र मिला कर खेतो के मेढो पर एवं फसल पर डालने से नीलगाय उस खेत से दूर भागती है

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    7. What's up, yup this paragraph is actually fastidious and I have learned lot of things from it concerning blogging.
      thanks.

      my web-site; Asian massage London, ,

      जवाब देंहटाएं

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