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    शुक्रवार, 9 जून 2017

    आज के युवा सोशल मीडिया और इन्टरनेट का इस्तेमाल संभल के करे |...मनोवैज्ञानिक डॉ जान्हवी श्रीवास्तव



    आज का पूरी दुनिया का वैश्वीकरण हो रहा है जिसका असर आज के युवाओं पे ग़लत पड़ रहा है और इसका कारण ये है की वो इन्टरनेट से देखता है पश्चिमी देशों की आजादी और अपने  आस पास उसी  समाज को पाने की कोशिश किया करता है  जिसमे कामयाब नहीं होने पे अक्सर जुर्म कर बैठता है जबकि वो पेशेवर मुजरिम नहीं होता |



    इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मैं मिला हुसेनाबाद मोहल्ले के निवासी मोहम्मद हसन डिग्री कालेज की मनोविज्ञान विभाग की प्रवक्ता डॉ .जान्हवी श्रीवास्तव से और उनसे बातचीत के दौरान उनके बारे में भी जानने  को मिला |

    डॉ .जान्हवी श्रीवास्तव  ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा स्टेट के एक छोटे से रामापुर गाँव में एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्म लिया था। प्राथमिक शिक्षा गाँव के ही सरकारी स्कूल से लिया था हाई स्कूल इंटर कालेज हथिगंवा से और इंटर बजरंग इंटर भदरी से किया।

    जान्हवी श्रीवास्तव ने बताया  कि उस समय गाँव में पांचवी तक का स्कूल था और काफी पिछड़ा हुआ इलाका था , जिसके कारण मेरे गाँव के लडकियाँ को आगे की पढाई करने में काफी मुश्किलें आती थी। मेरे पिताजी मुझे पढ़ाना तो चाहते थे लेकिन कालेज दूर होने के कारण डरते भी थे लेकिन मेरे जिद्द पर उन्होंने मेरा दाखिला स्कूल में करवा दिया। उनका सपना भी था मै डाक्टर बनू लेकिन आस पास साइंस कालेज ना होने के कारण मुझे हाई स्कूल के बाद की पढाई आर्ट साइड से करनी पड़ी। बीए में एडमिशन लेने के बाद ही मेरी शादी हो गई। शादी के बंधन में मुझे लगा कि मेरी पढाई यही समाप्त हो जाएगी।


    लेकिन जब मैंने अपने पति और ससुर जी से आगे पढाई जारी रखने का आग्रह किया तो दोनों लोगो ने केवल मुझे इजाजत ही नही दिया बल्कि हर तरह का पूरा सहयोग देने का वादा भी किया। मैंने बीए बजरंग डिग्री से स्नातक किया एमए , बीएड और पीएचडी पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से किया। इस दरम्यान पारिवारिक जीवन में तीन बच्चे भी हुए। इसके बाद भी इन्होने अपनी पढाई जारी रखा। जिसका परिणाम रहा कि आज जान्हवी श्रीवास्तव अपने शिखर पर है इसके बाद भी वे आज छात्र -छात्राओं को पढाने के साथ ही खुद पढाई जारी रखे हुए है जिसका परिणाम है उनकी पहली पुस्तक सन 2012 में (मनोवैज्ञानिक एंव परीक्षण) को अग्रवाल पब्लिकेशन आगरा ने प्रकाशित किया दूसरी किताब ( प्रयोगात्मक विधियाँ एवं सांखिकी ) 2013 में ग्रीन लिफ़ पब्लिकेशन वाराणसी से प्रकाशित हुई और एक सप्ताह पूर्व तीसरी किताब (व्यक्तित्व का मनोविज्ञानं) को अग्रवाल पब्लिकेशन आगरा ने प्रकाशित किया है।

    डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव  ने बताया की आज के युवाओं में लड़के और लड़कियों में मित्रता एक फैशन बन गया है लेकिन लडकियां अक्सर फ़ोन इत्यादि से बात चीत में सावधानी नहीं बरतती क्यूँ की आज की नयी तकनीक का इस्तेमाल उन्हें ठीक से नहीं आता | आज चाहे फ़ोन से बातें हो या विडियो कालिंग सब आटोमेटिक रिकॉर्ड हुआ करता है  जो अक्सर लड़कियों के लिए मुश्किलें कड़ी कर देता है |

    चाहे वो पश्चिमी पारिधान हो या नयी तकनीक का इस्तेमाल पहले उनके बारे में ठीक से समझ लें ,सावधानियां क्या लेनी चाहिए जान लें फिर उसका इस्तेमाल करें |
    डॉ .जान्हवी श्रीवास्तव एक बेहतरीन वक्ता |
    डॉ .जान्हवी श्रीवास्तव  एक अच्छी वक्ता ,कामयाब मनोवैज्ञानिक और मशहूर लेखिका भी है इसलिए हमारे समाज को उनसे बहुत आशा है और उम्मीद है की आज के युवाओं का ऐसे ही मार्गदर्शन करती रहेंगी |

    आप भी सुनिए डॉ .जान्हवी श्रीवास्तव से बातचीत के कुछ अंश |


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