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    रविवार, 25 जून 2017

    जौनपुर के प्रतिष्ठित परिवार और उनके पुरखे इतिहास के पन्नो से ।

     जौनपुर के प्रतिष्ठित परिवार और उनके पुरखे । 

    सैय्यद करामुल्लाह खा


    सैय्यद करामुल्लाह खा का सम्बन्ध ज़ैदी परिवार से था जिनकी नस्ल हज़रत मुहम्मद ( स अ व ) ने नवासे इमाम हुसैन के पुत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन से निकली है । सय्यद करामुल्लाह खा दिल्ली आये और वहाँ के शाही दरबार  अच्छी पकड़ अपने इल्म के कारण बना ली । उसके बाद मुहम्मद शाह ने इनको खान की पदवी और शाही रुतबे के साथ दो लाख की जागीर प्रदाम् की जो बनारस ,जौनपुर, आज़मगढ़ तथा इलाहबाद में थी । 

    अंतिम समय इनका काजगौन जौनपुर में बीता और वही अपने बाग़ में इनकी क़ब्र है ।


     मौलवी  गुलशन अली बड़े ही मसहूर हुए । मौलवी  गुलशन अली राजा बनारस कर दीवान थे और उनके छोटे भाई सय्यद मुहम्मद मोहसिन उच्च कोटि के कलाकार और गणितज्ञ थे और ज्ञान हासिल करने के लिए उन्होंने पश्चिमी और इस्लामी मुल्को की यात्रा की । मौलवी गुलशन अली चार नस्लों तक राजा बनारस के दीवान रहे और अंतिम दीवान खान बहादुर अली ज़ामिन हुयी ।

    इसके घराने वाले आज भी कजगाव की नज्म मंजिल मे और पानदारीबा मे रहते है


    जनाब सय्यद अली दाऊद

    जनाब सय्यद अली दाऊद  साहब हजरत मुहम्मद (स.अ.व) की 21 वीं नस्ल थे और बहुत ज्ञानी थे | इनको लाल दरवाज़ा के सामने मुहल्लाह सिपाह गाह में भी रहने का एक घर दिया गया था जिसके निशाँ आज भी मौजूद हैं | जनाब सय्यद अली दौड़ के घराने वाले इब्राहिम लोधी द्वारा उस इलाके को नष्ट करने के बाद वहाँ नहीं रहे और लाल दरवाज़ा से अलग हमाम दरवाज़ा पे आ गए फिर कटघरे से होते हुए आज पान दरीबा में रहते हैं | उनके घराने का एक घर जिसे आज मदरसा नासरिया के नाम से जाना जाता है आज भी मौजूद है जिसे उन लोगों ने वहाँ से पानदरीबा जाते वक़्त वक्फ कर दिया था| यह घराना जौनपुर में ७०० साल पुराना है जिसे आज लोग अपने समय के मशहूर सय्यद ज़मींदार खान बहादुर ज़ुल्क़द्र के घराने के नाम से जानते हैं | इनके रिश्तेदार पानदरीबा,सिपाह और कजगांव में फैले हुए हैं |  लाल दरवाज़े के पास एक मुहल्लाह सिपाह गाह है जिसे बीबी राजे ने बसाया था और वहाँ पे एक विहार और महिलाओ का कॉलेज १४४१ में बनवाया और उसके बाद यह लाल दरवाज़ा मस्जिद बनवाई | वो मदरसा तो आज मौजूद नहीं लेकिन लाल दरवाज़ा मस्जिद और  मदरसा ऐ हुसैनिया आज भी मौजूद है | इस लाल दरवाज़े के तीन गेट हैं जिसमे से पूर्व वाला गेट सबसे बड़ा है | जनाब सय्यद अली दाऊद की २१स्वीन नस्ल आज पान दरीबा जौनपुर में रहती है | इनका नस्ल नाम बहुत सी इतिहास की किताबों में देखा जा सकता है |जिसमे से ख़ास हैं इबिद और शजरा जो १९६५ में कजगांव से इंजिनियर सय्यद मोहम्मद जाफ़र साहब ने छपवाया था | वैसे यह शजरा (Race Chart) पकिस्तान और इंग्लैंड से भी छपा है जो इस खानदान के पास देखा जा सकता है |



    सय्यद नासिर अली ज़ुल्क़दर बहादुर 

    सय्यद नासिर अली ज़ुल्क़दर बहादुर 

    सय्यद नासिर अली ज़ुल्क़द्र बहादुर जौनपुर के मशहूर ज्ञानी संत की नस्ल से थे और जका ताल्लुक़ भी इमाम हुसैन (अ स ) की नस्ल से है । इन्होने दीवान काशी नरेश मौलवी गुलशन अली कजगाँवी से इन्होने शिक्षा प्राप्त की और बाद में अंग्रेज़ी सरकार में उच्च पद पे जौकरी कर ली । अपनी योग्यता और कुशलता के चलते उस समय इन्हे डिप्टी कलक्टर का पद प्राप्त हुआ जहाँ इनकी तख्वाह ७०० रुपये महीना थी । इनको बाद में ज़ुल्क़द्र बहादुर और खान बहादुर का खिताब और १५०० रुापये के शाही वस्त्र दे के इज़्ज़त अंग्रेजी सरकार ने दी और बाद पे १८६६६ पे जिलाधीश की पदवी पे रहते इनका देहांत इलाहबाद में हो गया ।

    इनका  खानदान आज भी पान दारीबा मे जुल्क़दर मंजिल मे रहता है  

    राजा जौनपुर राजा शिव लाल डूबे 

    जौनपुर जनपद में सबसे बड़ी रियासत राजा जौनपुर की थी जिसके संस्थापत राजा शिव लाल डूबे थे । राजा राजा शिव लाल का देहांत १८३६ इ में हुआ लेकिन वो देहांत के समय बनारस , गोरखपुर, आज़मढ और मिर्ज़ापुर पे काफी जादाद छोड़ के गए । रामगुलाम जो शिव लाल के पौत्र थे उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया जबकि उनके पुत्र बाल दत्त जीवित थे । 

    १८४१ में राजा रामगुलाम का देहांत हो गया और सत्ता राजा बालदत्त के हाथ में आ गयी और १८४४ में राजा बालदत्त के देहांत के बाद राजा लछमन गुलाम के हाथ सत्ता आई जिनका देहांत १८४५ में ही हो गया और राजा बालदत्त की विधवा रानी तिलक कुंवर ने तीन वर्षों  के काम काज को देखा ।  १८४८ में रानी साहिबा का भी देहांत हो गया और राजा रामगुलाम का लड़का लड़का जो वयस्क नहीं था राजा हुआ और यहीं से  गड़बड़ी पैदा होने लगी । उसके बाद राजा हरिहर डूबे से रियासत होती हुयी राजा शंकर दत्त डूबे तक पहुंची जो संतान वहीं थे । उसकै बाद राजा शिव लाल के बड़े भाई सदानंद के पुत्र श्री कृष्ण डूबे को राजा की गद्दे पे बिठाया और उनकी म्रत्यु के बाद राजा यादवेन्द्र डूबे के हाथ सत्ता आयी । १९५७ में राजा यादवेन्द्र डूबे आज़ादी के बाद राजनीति में आ गए और जनसंघ की टिकट से १९५७ और १९६२ में विधान सभा के सदस्य रहे ।

    जौनपुर के कुछ अन्य महान संतो के नाम इस प्रकार है ।



    शेख वजीहुद्दीन अशरफ ,उस्मान शीराज़ी ,,सदर जहा अजमल,क़ाज़ी नसीरुद्दीन अजमल, क़ाज़ी शहाबुद्दीन मलिकुल उलेमा क़ाज़ी निजामुद्दीन कैक्लानी, मालिक अमदुल मुल्क बख्त्यार खान, दबीरुल मुल्क कैटलॉग खान, मालिक शुजाउल मुल्क मखदू ईसा ताज,शेख शम्सुल हक़ ,मखदूम शेख रुक्नुद्दीन, सुहरवर्दी, शेख जहांगीर, शेख हसन ताहिर,मखदूम सैय्यद अली दाऊद कुतुबुद्दीन, मखदूम शेख मुहम्मद इस्माइल ,शाह अजमेरी,ख्वाजा क़ुतुबुद्दीन ,ख्वाजा शेख अबु सईद चिस्ती ,मखदूम सैयद सदरुद्दीन, शाह सैय्यद ज़ाहिदी, मखदूम बंदगी शाह,साबित मदारी।, शेख सुलतान महमूद इत्यादि
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