Sunday, November 23, 2014

सेक्स पावर बढ़ाने के कुछ बाजारू नुस्खे |

भारतीय समाज में सेक्स के टॉपिक पर खुलेआम बातें करने की इजाज़त नहीं  हैं, इसलिए अक्सर लोग इस विषय पे  भ्रम के श‍िकार हो जाते हैं| आज का युवा उस समय जब उसके शरीर में परिवर्तन हो रहे होते हैं तो सेक्स के विषय पे अपने हम उम्र मित्रों और सस्ते साहित्य या आज के युग में पोर्न से जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है | ये सारे जानकारी हकीकत में उसे इस विषय पे सही जानकारी देने की जगह मानसिक रोगी बनाती चाय जाती हैं और वो बुरी आदतों का या भरम का शिकार हो जाता है | अधकचरे सेक्स गाइड,  विज्ञापनों या पोर्न से भी कोई फायदा नहीं मिलता बल्कि नुकसान अधिक होता है |


समस्या ये हैं की युवा को तो इस विषय पे जानकारी चाहिए और  हमारे समाज में माता पिता ये जानकारी देते नज़र नहीं आते तो मजबूरी में युवा को अधकचरे सेक्स गाइड,  विज्ञापनों या पोर्न का सहारा लेना पड़ता है |इस समस्या का हल केवल यही है की सही समय पे अपने युवाओं को सेक्स के विषय पे सही जानकारी उनके घर से ही उन्हें दी जाए |

चलिए ये तो हुयी समस्या लेकिन आज युवा क्या सीखता है इन अधकचरे सेक्स गाइड,  विज्ञापनों या पोर्न से और किन मुश्किलों में फँस जाता है इस विषय पे भी ध्यान दिया जाए |

आज आप ट्रेन से सफ़र करें तो जगह जगह दीवारों पे गुप्त रोग का शर्तिया इलाज जैसे इश्तेहार देखने को मिल जायेंगे जिनके चक्कर में फंसने से केवल नुकसान होता है और इसकी दूकान चलने का सही कारण युवाओं का इस विषय पे सही जानकारी का न होना है |

ट्रेनों के भीतर और रेलवे लाइनों के इर्द-गिर्द अक्सर ऐसे विज्ञापन दिखते हैं, जिनमें 'बचपन की गलतियों' हस्तमैथुन  से पैदा हुई कमजोरी दूर करने के दावे किए जाते हैं | हस्तमैथुन हकीकत में एक बुरी आदत है लेकिन ध्यान रहे इस से पैदा हुयी मुश्किलों का इलाज इन नीम हकीमो के पास नहीं बल्कि मानसिक रोग का इलाज करने वाले डॉ के पास होता है |

अक्सर ऐसे विज्ञापन नजर आ जाते हैं, जिसमें यह दावा किया जाता है कि अमुक तेल के इस्तेमाल से सेक्स की क्षमता में बढ़ोतरी होती है और सेक्स के दौरान भरपूर आनंद आता है| सडको पे बिकते सांडे का तेल से लेकर न जाने बाज़ार में कौन कौन से तेल मौजूद है  लेकिन ये भी एक ऐसा झूट है जिसका व्यापार बहुत तेज़ी से फल फूल रहा है | कई बार लोग सड़कों के किनारे तंबू लगाए बाबाओं की दुकानों से दवा खरीदते देखे जाते हैं जहां अज्जेब अजीब तरह की जड़ी बूटियाँ रखी होती है और ये भी नहीं पता होता की ये क्या हैं और इनका फायदा होगा भी या नहीं | हकीकत में ये भी युवाओं की सेक्स के विषय पे अज्ञानता का फायदा लेने वाला व्यापार है जो फल फूल रहा है |

ऐसे ही लिंग की लम्बाई बढाने के दावे , तंत्र मंत्र से सेक्स पॉवर बढाने के दावे सब झूठे हुआ करते हैं | वैसे भी डॉक्टरों के अनुसार लिंग की लम्बाई से और सेक्स में संतुष्टि का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है |


गाँव इत्यादि में ऐसे व्यापार बड़ी तेज़ी के साथ फलते फूलते दिखाई देते हैं जिनसे युवाओं को बचना चाहिए और सेक्स पॉवर बढाने का सबसे आसान तरीका ये है की अपनी पाचन शक्ति को दुरुस्त रखें और अश्लील किताबों को ,पोर्न को अधिक देखने से बचें |

Note:  हर सप्ताह रविवार के दिन सेक्स सम्बंधित जानकारी जौनपुर के युवाओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमारा जौनपुर की तरफ से आप सभो को दी  जाएगी |
आपकी अपनी वेबसाइट हमारा जौनपुर , अपने वतन जौनपुर को समर्पित | संचालक एस एम् मासूम

Saturday, November 22, 2014

पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डाॅ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम जौनपुर में |

जौनपुर। वन विहार रोड पर स्थित नेहरू बालोद्यान इं0कालेज परिसर में 22 से 24 नवम्बर 2014 के मध्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा संचालित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डाॅ0एपीजे अब्दुल कलाम आज अपरान्ह 1ः00 बजे दीप प्रज्जवलित कर सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वन्दना भी प्रस्तुत किया गया। इससे पूर्व छात्राओ एवं विद्यालय प्रबन्धक सी0डी0सिंह द्वारा मंचस्थ सभी अतिथियों को बुकें देकर स्वागत किया। डा0 अजय सिंह ने मुख्य अतिथि पर लिखी पुस्तक का कुछ अंश पढ़कर सुनाया जिसपर दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया।

मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डाॅ0एपीजे अब्दुल कलाम नें इसरो की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अन्तरिक्ष में जितने भी सौर्य मण्डल हैं इनमें ग्रह एवं उपग्रह के बारे में विस्तार से बताया और बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।दृढ़ निश्चय कठिन परीश्रम से सभी असम्भव काम को सम्भव किया जा सकता है।हिन्दुस्तान में विभिन्न प्रदूषणों से मानव को पैदा हो रहे खतरे के प्रति आगाह किया तथा इसका मुख्य कारण दुनिया में बढ़ रहे लोगों की गतिविधियों के निराकरण के लिए उसके बाल वैज्ञानिकों को आगे आना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उ0प्र0 देश ही नही दुनिया का सबसे बड़ा राज्य है। यदि उ0प्र0 का वैज्ञानिक विकास होगा तभी देश का विकास होगा। उन्होंने बताया कि उ0प्र0 50 लाख नवयुवक छात्र/छात्राओं को परामर्श दिया कि उनके स्किल विकास से ही देश प्रदेश का विकास सम्भव है। इसके लिए उन्होंने तीन सूत्र दिए उन्होंने कहा कि सामाजिक समस्याओं को देखिए,स्वप्न संदेश बनाइए, अपनी मातृ भूमि और माता को मुस्कराने के लिए सुनियोजित तरीके से परीश्रम करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने बढ़ते हुए बाल वैज्ञानिकों से कहा कि जीवन का ध्येय प्राप्त करने के लिए कठिन परीश्रम-कठिन परीश्रम करने पर ही आपको सफलता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आप समाज और प्रकृति को क्या दे रहे हैं। आप उनका भी ध्यान रखिए क्योंकि प्रकृति आपको सबकुछ दे रही है। इसे सुनिश्चित रखने के लिए आप सब बाल वैज्ञानिकों को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि चीन रूस और अमेरिका के विकास करने में वैज्ञानिक अधिक है और विकसित देश है। हमारे देश में दुनिया के सभी देशों से संसाधन अधिक है। आज आवश्यकता है सदुपयोग करने की। वह आपसब ही कर सकते है। मौके पर ही बाल वैज्ञानिक कुड़ाल सिंह, आदिति आदि ने प्रश्न पूंछा जिसपर उत्तर देते हुए बाल वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों को बाल विज्ञान के प्रश्न पूंछने के लिए वेबसाइट- से जानकारी लेने की सलाह दी।



अपने उद्बोद्यन के बाद डा0 कलाम ने उपस्थित तीन छात्रों से सवाल करने को कहा। जिसमें दो छात्रों ने अग्रेजी में सवाल किये लेकिन कनौज से आया अनुपम मिश्रा नामक तीसरे छात्र ने सवाल किया कि चायना, जापान और अमेरिका अपनी मात्र भाषा बोलकर विकासशील देश हो सकता है तो हम अपनी मात्र भाषा हिन्दी बोलकर आगे क्यों नही बढ़ सकते। छात्र का सवाल सुनते ही पूरा पण्डाल तालियों की गड़गड़ाहट से गुंज उठा। डा0 कलाम ने बताया कि हिन्दी काफी कठिन भाषा है उसका इस्तेमाल टेक्लिाॅजी में करना मुमकीन नही है।

 

जौनपुर शहर प्रतिभाओं से भरा पड़ा है

जौनपुर शहर प्रतिभाओं से भरा पड़ा है. ऐसे ऐसे नायाब मोती इस खजाने में तलाशने पे मिलते हैं जिन्हें पाने के बाद विश्वास ही नहीं होता कि ऐसे प्रतिभाशाली लोग भी इस शहर में रहते हैं. अपनी इस जौनपुर की वेबसाईट के द्वारा में ऐसी ही प्रतिभाओं को आप सभी के सामने पेश करने की कोशिश समय समय पे किया करता हूँ .

जौनपुर एक ऐसा है शहर जो कभी शर्की राज्य रहा और एक शतक तक राजधानी की तरह से इस्तेमाल किया जाता था लेकिन यह भी सत्य है कि  इस इलाके को काफी हद तक अनदेखा किया जाता रहा है और इसी कारण से रोज़गार के अवसर यहाँ कम मिला करते हैं. व्यापार के लिए सुविधाओं का भी काफी अभाव रहा है इस छेत्र में |  जबकि शर्की राज्य में जौनपुर एक महत्वपूर्ण व्यापार का गढ़ रहा है. यहाँ दूर दूर से लोग व्यापार के लिए आया करते थे.

विभिन्न प्रकार की प्रतिभाओं से भरे शहर जौनपुर की शोहरत आस पास के इलाकों में सिमट के रह गयी है जो की चिंता का विषय है. जौनपुर को एक महत्वपूर्ण  पर्यटन स्थल घोषित न किया जाना आज भी समझ में नहीं आता | जौनपुर निवासी देखने में तेज तर्रार और भीतर से भोले और दिल के साफ़ होते हैं. सुविधाओं के अभाव में अक्सर यहाँ कि प्रतिभाएं पूर्वांचल तक ही सिमट के रह जाया करती हैं |

मुझे जब जब अवसर मिला में अपने वतन जौनपुर पहुँच के यहाँ के प्रतिभाशाली लोगों से मिलने कि कोशिश  करता रहा | कविओं, लेखकों ,इतिहासकारों से मिला, प्रतिभाशाली पत्रकारों, और समाजसेवकों से मिला, तलवारबाजों, मूर्तिकारों, अध्यापकों, नेताओं ,समाजसेवकों और धर्म गुरुओं से मिला. इन सभी यादगार मुलाकातों को जल्द से जल्द आप सभी तक पहुँचाया जाएगा जिससे पूरा विश्व यहाँ कि प्रतिभाओं को जान सके |

यहाँ के स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों में सुविधाओं को बढ़ाने कि आवश्यकता है और इस बात कि भी आवश्यकता है कि लोगों को सही जानकारी दी जाए. यहाँ पे लोगों को उनके अधिकारों के बारे में बताया जाना आज की एक बड़ी ज़रूरत बन गया है. अधिकारों की जानकारी न होने के कारण अक्सर उन्हें उस काम के लिए भी बैंक और सरकारी दफ्तरों के बाबुओं को चाय पानी देना पड़ता है जो उनका अधिकार है और बाबुओं को उसी काम को करने की तनख्वाह मिलती है | ऐसे काम के लिए भी उनको उनके अधिकारों की जानकारी न होने के कारण घंटो अपने बहुमूल्य समय को बर्बाद करना पड़ता है.

शहर की सड़कों की खराब हालत और बिजली की अत्यधिक कटोती भी इस शहर  की तरक्की में एक बड़ी बाधा है |

आज जौनपुर का युवा विश्व के साथ मिल के चलना चाहता है, तरक्की के रास्ते तलाशता नज़र आता है. लेकिन अक्सर स्नातक होने के बाद नौकरियों के फार्म भरते और टेस्ट –इंटरव्यू देते समय गुज़र जाता है और फिर मायूसी उसे घेरने लगती है. फिर दौर शुरू होता है सउदी, दुबई में छोटे मोटे काम की तलाश या फिर सड़कों और चाय की दुकानों पे दोहरा, पान खाके झूटी शान की बातें और  समय की बर्बादी  का. ऐसे में उसकी प्रतिभा दब के रह जाती है और अक्सर उनमें से कुछ ग़लत राह पे भी चल निकलते हैं | इस महत्वपूर्ण विषय पे जल्द ही वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्विद्यालय के कुलपति डॉ सुन्दरलाल जी के विचार आपके सामने पेश किये जाएंगे.

इस वेबसाइट के ज़रिये जौनपुर निवासीयों की प्रतिभाओं को सामने लाना, यहाँ पे व्यापार और रोज़गार के अवसरों को सामने लाना ,इन्टरनेट के इस्तेमाल से विश्व के साथ जुडना और इन्टरनेट के इस्तेमाल से रोज़गार के अवसरों को सामने लाना भी इस वेबसाइट का मकसद है |

यह एक बड़ा सत्य है कि जो एक बार जौनपुर को करीब से देख लेता है यहाँ बार बार आना चाहता है | तो क्यों न मिलकर जौनपुर को ऐसा बनाया जाए की यहाँ के लोगों को अपने वतन से दूर रोज़गार की तलाश में न जाना पड़े

फील गुड का एहसास.

जी हाँ जनाब यह एक ऐसा एहसास है जो अक्सर लोगों को कुछ खास पसंदीदा काम करने में आता है. नेक इंसान को किसी की मदद करने में फील गुड का एहसास होता है तो बुरे इंसान को लूट,चोरी,बुराई इत्यादि बुरे काम करने में यह एहसास पैदा हुआ करता है.

आज के समाज में इंसान अकेलेपन का शिकार होता जा रह है. यह सत्य है की महानगरों में व्यस्त जीवन के कारण इंसान अकेलेपन का शिकार हुआ करता है लेकिन व्यस्तता अकेले ही इसका कारण नहीं. आज के रिश्तों में ईमानदारी की कमी, दिखावा, खुदगर्जी ओर मौकापरस्ती भी लोगों के अकेलेपन  का एक बड़ा कारण है. आज एक इंसान अपने जैसे किसी दुसरे इंसान से अपना दुःख दर्द बांटते हुए डरता है क्यों की मदद मिलने की जगह बेईज्ज़ती होने की आशंका अधिक हुआ करती है. आज के युग में वोह खुशकिस्मत है  जिसे भरोसेमंद ईमानदार दोस्त रिश्तेदार ओर मददगार पड़ोसी मिल जाए.

ऐसे समाज में रहने वाला इंसान अब आभासी दुनिया का सहारा अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए लेने लगा है . सोशल वेबसाईट की कामयाबी का राज़ भी यही है की अकेलेपन के  मारे इस इंसान को वहाँ जा के फील गुड का एहसास होता है. जहां इस समाज में एक दोस्त बना पाना मुश्किल हुआ करता है वहीं इन सोशल वेबसाइटों पे वो हजारों मित्र बना लेता है ओर उनसे बातें कर के अपने लेख तसवीरें इत्यादि दिखा के खुश हो लेता है. गौर ओ फ़िक्र की बात यह है की यदि हर इंसान इस समाज में फील गुड के एहसास को पा लेना चाहता है तो ऐसी क्या मजबूरी है की उसे वास्तविक दुनिया से आभासी दुनिया की ओर रुख करने पे मजबूर होना पड़ रह है?

कहीं न कहीं यह हम सब की ही एक बड़ी कमी है और इसे दूर करने के लिए हम सभी को अपने रिश्तों में ईमानदारी लानी होगी और अपनी  सामाजिक ज़िम्मेदारियों को भी ईमानदारी से निभाना होगा.

 Writer: S.M.Masum

Friday, November 21, 2014

टीडी कालेज के छात्र चुनाव एक नज़र में - अध्यक्ष पद पर रामपाल सिंह विजयी |

 टीडी कालेज के छात्र चुनाव में अध्यक्ष पद पर रामपाल सिंह ने अपने निकटत प्रतिद्वन्दी वरूण सिंह को पांच सौ से अधिक वोट से करारी शिकस्त देते हुए जीत हासिल किया है। रामपाल को 2392 मत मिले है वरूण सिंह को 804 वोट मिला है। उपाध्यक्ष पर मनीष यादव जीत चुके है उधर महामंत्री पद पर शैलेन्द्र यादव 985 वोट से जीत गये है। मनीष यादव ने  900 वोटो के अंतर से जीत हासिल किया है।



मतगणना में आये परिणाम के अनुसार
अध्यक्ष पद पर अमित कुमार सिंह को 44
रामपाल सिंह को 2392
संतोष यादव को 573
 वरूण सिंह नेहाल को 804 मत मिले।
उपाध्यक्ष पद पर छाया यादव को 925
मनीष यादव को 1875
पूर्णजीत गुप्ता को 617
सौरभ यादव को 413 वोट मिला है।
महामंत्री पद पर खुशबू सिंह को 599
अंकित सिंह को 309
अशीष कुमार सिंह को 145
अजय यादव को 328
स्वप्निल सिंह को 227
 शालिनी वर्मा को 765
शैलेन्द्र यादव को 985
शिवेन्द्र प्रताप राय को 460 मत प्राप्त हुआ
1156 मत पाकर सत्य नारायण यादव निर्वाचित हुए तो उनके निकटतम प्रतिद्वंदी आशीष सिंह को 1143 वोट मिले। इस तरह दोनों के बीच महज 13 वोटों का अंतर रहा। 
इसके अलावा कला संकाय प्रतिनिधि के पद पर दुर्गा प्रसाद, विज्ञान संकाय प्रतिनिधि कुलभूषण दूबे, वाणिज्य संकाय प्रतिनिधि आशीष उपाध्याय निर्वाचित हुए। विधि संकाय पद पर अन्नू यादव तथा कृषि संकाय प्रतिनिधि ज्ञानेश सिंह का निर्विरोध चयन हुआ। शिक्षा संकाय प्रतिनिधि पद पर कोई नामांकन ही नहीं दाखिल हुआ था।

15 कि0मी0 के दायरे में घर-घर गैस पहुंचे ---जिलाधिकारी सुहास एलवाई


जौनपुर।  आज अपरान्ह जिलाधिकारी सुहास एलवाई एवं पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार की अध्यक्षता में जिले में कार्यरत एल0पी0जी0 डीलरों के साथ एक आवश्यक बैठक सम्पन्न हुई। जिलाधिकारी ने एक-एक डीलर से बात किया तथा घर-घर गैस पहुंचाने का भी निर्देश दिया। 15 कि0मी0 के दायरे में घर-घर गैस पहंुचाने का प्राविधान है।  गैस बुकिंग के 72 घण्टे के अन्दर गैस आपूर्ति हरहालत में करने कर निर्देश दिया। गैस बुकिंग आॅनलाइन एवं टेलीफोन द्वारा बुक करा सकता है। सीधे गैस बुकिंग नही किया जायेगा। जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी सीमा सिंह को फर्जी राशनकार्ड की जाॅच एवं कालाबाजारी बन्द करने का निर्देश दिया। एक प्रतिशत र्कम्प्यूटर से निकलवाकर जाॅच करायी जायेगी।

बहुत दिन से गैस बुकिंग न कराने वालों का गैस कनेक्शन बन्द करने का नोटिस दिया जाय। के0वाई0सी0 फार्म न भरने वाले उपभोक्ता अपने गैस एजेन्सी पर दस दिन के भीतर अवश्य भरे अन्यथा आॅन लाइन रजिस्ट्रेशन न कराने वाले के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। अश्वनी गैस एजेन्सी मुंगराबादशाहपुर का लाइसेन्स तीन साल से निरस्त की कार्यवाही बताये जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारी को 15 दिन के अंदर कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया अन्यथा उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। 01 जनवरी 2015 से गैस उपभोक्ताओं के खाते में सीधे सब्सिडी भेजी जायेगी। उपभोक्ता डी0बी0टी0एल0 फार्म अवश्य भरे। इसके लिए आधार कार्ड/ बैंक खाता नं0 देना आवश्यक है। पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने गैस की कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध जाॅच करके गैस एजेन्सी बन्द करीा दी जायेगी। इस अवसर पर आपूर्ति निरीक्षक आर0के0तिवारी सहित जिले भरके 22 डीलर भी उपस्थित रहे। 

Wednesday, November 19, 2014

जौनपुर के साहित्यकार-वामिक जौनपुरी

जौनपुर जनपद का अनूठा इतिहास प्राचीन, ऋषि- मुनियों से संचित, समृद्ध, पौरातन्‍य के स्‍वाभिमान से उन्‍नतशील, मध्‍ययुगीन उलटफेर से विधकित, विदेशी सत्‍ता के विरूद्ध क्रान्तिकारी स्‍वतन्‍त्र सूरमाओं के कथा स्‍फूलिगो से ल्‍योतिष तथा आ‍धुनिकताग्रही जीवन चेष्‍टाओं से अंकित रहा है। मध्‍यकाल में जौनपुर की शैक्षिक उपलब्धियों एव मधुरिया रागिनीमय संगीतिक उत्‍कर्ष, प्राकृतिक सौन्‍दर्य और प्रसिद्धी को सुनकर कबीर, नानक, जायसी जैसे ज्ञानी पुरूष इसे सजोने की स्‍पृहा का सन्‍वरण नही कर सके थे। जनपद में शेख नबी कुतवन, नूर मोहम्‍मद, आलम, मंथन, बनारसी दास जैन,  उरस्‍ट मिश्र, संत दाई दयाल आदि ने पन्‍द्रहवीं शताब्‍दी से लेकर उन्‍नीसवीं सदी के पूर्वाद्ध तक अपनी कविताओं, छंदों और प्रेम व्‍यंजनाओं द्वारा आत्‍मा- परमात्‍मा, लोक-परलोक और नीति कार्यो की व्‍याख्‍या की।
    मैथिल कोकिल विद्यापति ने 1360- 1450 ई0 में कीर्तिलता की रचना की। कविता के छायाकारी धरातल पर आते-आते स्‍वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी, गिरजा दत्‍त शुक्‍ल गिरीश, अम्बिका दत्‍त त्रिपाठी, डा0 क्षेम ने मानवता को शांतिपूर्ण धरातल प्रदान किया। स्‍वर्गीय गिरीष ने महाकाव्‍य लिखकर सनातन, सांस्‍कृतिका को उपमा प्रदान की। डा0 श्रीपाल सिंह क्षेम ने एवं पं0 रूप नरायण त्रिपाठी ने अपनी रचनाओं द्वारा साहित्‍य को गौरव प्रदान किया। डा0 क्षेम को साहित्‍य महारथी, साहित्‍य भूषण, सहित्‍य वाचस्‍पति आदि अनेको उपलब्धियों से विभूषित किया जा चुका है। उनके शब्‍द कबूतर की तरह उड़ते है और मिट्टी की ध्‍यान रम गये लगते है। यथार्थ से निकलकर कविता की डालियों में झूमकर सहित्‍य की गन्‍ध फैलाते है। स्‍वर्गीय पं0 रूपनरायण त्रिपाठी की रचनाओं ने इस जनपद की माटी की सुगन्‍ध को अनवरत साहित्‍य में विखेरने का प्रयास किया। सहज एवं सरल भाषायें, आंचलिक बोलियां समेटे उनके काव्‍य सहित्‍य की अमूल्‍य निधि है। नई पीढ़ी में डा0 रवीन्‍द्र भ्रमर, मार्कन्‍डेय, डा0 विश्‍वनाथ, अजय कुमार, डा0 लाल साहब सिंह, डा0 राजेन्‍द्र मिश्र, स्‍वर्गीय सरोज आदि अनेक समीक्षक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं एवं लेखो द्वारा समाज में बिखराव से उत्‍पन्‍न संवेदनात्‍मक प्रतिक्रिया, कुरीतियों, उत्‍पीड़न आदि के विरूद्ध जाग्रत को विभिन्‍न कोणो से उजागर किया है।

    हिन्‍दी रचनाकारों की तरह उर्दू कवियों एवं शायरों की रचनाओं में भी ईश्‍वरीय सत्‍ता प्रेम, गाथाकारों का सुफियाना भाव दृष्टिगोचर होता है। स्‍वर्गीय कामिल शफीकी, चरन शरन नाज, हाफिज मोहम्‍मद, अदीम जौनपुरी, स्‍वर्गीय फजले हाजी, शायर जमाली शफीक, बरेलवी आदि अनेक लोगों ने अपने कलामों से उर्दू अदब को गौरव प्रदान किया है। वामिक जौनपुरी ने उर्दू अदब को जो गौरव दिया है वह सदैव याद किया जायेगा। सन् 1942-1945 के बीच भूखा बंगाल और मीना बाजार कवितायें देश भर में लोकप्रिय हुई

    जनपद जौनपुर में ऐसे कई सहित्‍यकार, शायर एवं अन्‍य भूले बिसरे है, जिनका नाम बड़े ही गर्व से लिया जाता रहा है, उसी में एक ऐसा नाम सामने आया है जो बहुत कम लोग ही जानते है। शौकत परदेशी एक ऐसा नाम है, जो जनपद में ही नही परदेश एवं देश के साहित्‍यकारों और शायरी से जुड़े लोगों में बेहद मशहूर रहा है। कविता, पत्रकारिता और शेरो-शायरी के माध्‍यम से जौनपुर की माटी का नाम रौशन करने वालो में मुहम्‍मद इरफान ऊर्फ शौकत परदेशी का नाम बड़े इज्‍जत के साथ लिया जाता है। यह पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के पहले शायर है, जिन्‍हे हिज मास्‍टर्स वायस रिकार्डिग कम्‍पनी ने अनुबन्धित किया। श्री परदेशी की भाषा और शैली इतनी लोकप्रिय रही कि पुराने लोग उन गीतों को बराबर गुनगुनाया करते है।


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