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Sunday, July 20, 2014

रईस चोर जो रखता है सत्ताईस प्रेमिकाएं |


इश्क जब जुनून बन जाता है तो आशि‍क सारी हदें पार कर जाता है। जिले के सिगरा थाने की पुलिस ने एक ऐसे शख्‍स को गि‍रफ्तार कि‍या है, जि‍स पर आशि‍की के लि‍ए चोरी की वारदातों को अंजाम देने का आरोप है। बॉलीवुड फिल्मों की तरह उसकी 27 प्रेमिकाएं हैं। उसने अपने बदन पर उनके नाम गुदवाए हैं। उसके प्रेमि‍काओं की फेहरि‍स्‍त में 16 से 28 साल की लड़कि‍यां शामि‍ल हैं।

 इस सि‍रफि‍रे आशि‍क का ताल्‍लुकात वाराणसी के रईस परि‍वार से है। उसके चाल-चलन और अय्याशी से तंग आकर घर वालों ने पैसे देना बंद कर दि‍या। उस आरोपी की आशि‍की का आलम यह है कि‍ वह प्रेमि‍काओं को महंगे गि‍फ्ट देता था। खासकर गरीब लड़कि‍यों को आकर्षित करने के लि‍ए मदद का ऑफर देता था। प्रलोभन और लालच दि‍खाकर गर्लफ्रेंड बनाता था।    

 पुलिस ने जयमंगल नाम के एक शख्स को उसके साथी गुडलक के साथ बाइक चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने बताया कि पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में उसकी 27 से ज्यादा प्रेमिकाएं हैं। उसके सीने, गले और हाथ समेत शरीर के कई हिस्सों पर प्रेमिकाओं के नाम गुदे हुए हैं। प्रेमिकाओं को गिफ्ट देने के लिए वह चोरियां करता था। पूर्वांचल के कई थानों में वह चोरी की धाराओं में वांछित है।

  आरोपी चोर ज्यादातर उन लड़कियों को फांसता था, जो आर्थिक रूप से थोड़ा कमजोर हों। पारिवारिक मदद के नाम पर वह लड़कियों के करीब जाता था। उन्हें अपने झूठे वादों में फंसाता था। उनसे नजदीकियां बढ़ाने के लिए वह उनसे तरह-तरह के वादे करता था। उसे अपनी प्रेमिकाओं को महंगे गिफ्ट, ज्वेलरी देने और फिल्म दिखाने का शौक था।

 जयमंगल जिस भी लड़की से जुड़ता था, उसके नाम को अपने शरीर पर गुदवा लेता था। उसकी 27 प्रेमिकाएं थीं और उसने बारी-बारी सबके नाम गुदवाए थे। 

Thursday, July 17, 2014

हमका मेला में चलिके घुमावा पिया झुलनी गढ़ावा पिया ना।


बारिश तो इस बार अभी तक पूरी तरह से नहीं आ पायी लेकिन इस वर्षा ऋतू का असर जौनपुर वासियों पे धीरे धीरे होने लगा है |

दो  दिन पहले डॉ. पवन मिश्रा ने अपने वतन से प्रेम को कुछ ऐसे व्यक्त किया था|  "हमारे गांव में इस समय महिलाये झूले पर बैठ कजरी गा रही होंगी। पेंग मारे जा रहे होंगे। हलकी बारिश में भीगे ज्वान नागपंचमी की तैयारी में अखाड़े में आ जुटे होंगे और मैं यहाँ ७०० किलोमीटर दूर कम्प्यूटर तोड़ रहा हूँ। खैर आप लोग लोकभाषा में लिखे इस गीत और भाव को देखिये। "

और एक कजरी गीत लिख डाला | अब ऐसे में स्वरों और संगीत की दुनिया से जुड़े डॉ मनोज मिश्र जी कैसे चुप  बैठते | उन्होंने भी इस कजरी को अपना स्वर दे डाला और इतने बेहतरीन अंदाज़ में गाया की बारिश का मज़ा दुगना हो गया |

आप सब भी इस कजरी का आनंद लें |


कभी हमारे गाँव छंगापुर को तालाबों का गाँव कहा जाता था।- डॉ पवन विजय

हमारे गाँव को तालाबों का गाँव कहा जाता था।

सिउपूजन दास कहते थे...

छंगापुरा एक दीप है बसहि गढ़हिया तीर।
पानी राखो कहि गए सिउपूजन दास कबीर।।

हमारे गांव के उत्तर की तरफ बड़का तारा करीब बीस बीघे में फैला हुआ। फिर पंडा वाला तारा पूरब में दामोदरा और मिसिर का तारा कोने में तलियवा। पच्छिम में दुर्बासा तारा, दक्खिन में गुड़ियवा तारा। इसके अलावा हर घर के आस पास फैले खाते और बड़े बड़े गड़हे वाटर हार्वेस्टिंग के जबरदस्त स्रोत पूर्वजों द्वारा आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाये गए थे। बाग़ बगीचों से लदा फंदा और पानी से भरे कुंओ और ठंडी ठंडी हवाओं वाला हमारा गाँव बारहो महीने खुशहाली के गीत गौनही गाता था।

समय बदला पैंडोरा बॉक्स खुला। लालच और ईर्ष्या के कीट बॉक्स में से निकल कर हमारे गाँव में शहर वाली सड़क और टीवी के रस्ते घुस गए।

कल मेरा भतीजा आया था बता रहा था कि चाचा अपना कुंआ अब सूख रहा है। गाँव में तकरीबन सारे कुंये सूख गए हैं। लोगों ने अब सबमर्सिबल लगवा लिए है बटन दबाया पानी आ गया। पंडा वाला तालाब को पाट दिया गया है वहा दीवार उठा दी गई है। लल्लू कक्का ने घर के सामने का खाता पाट दिया है। गुड़ियवा और तलियये वाला तालाब खेत में बदल गया है। बाग़ को काट काट लोग लकड़ियां बेंच पईसा बना रहे। अब गाँव में हर घर टीवी है रोज बैटरी चार्ज कराने को लेकर झगड़ा मचा रहता है। बाप खटिया में खांसता रहता है बच्चे मोबाइल में रिमोट से लहंगा उठाने वाला गाना सुनने में मस्त। गाँव में कंक्रीट के चालनुमा मकान सरकारी आवास योजना से बन कर तैयार हो रहे जिसे ग्राम प्रधान कमीशन लेकर बाँट रहा। हर घर में अलगौझी। भाई भाई से छोड़िये बाप अलगौझी अऊर अबकी गाँव में छंगू की मेहरारू छंगुआ के जेल भिजवाई के केहु अऊर को अपने साथ जौनपुर भगा ले गयी। । इज्जत आबरू मान मर्यादा सब खत्म।
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तालाब खतम
पानी खतम
गाँव कैसे ज़िंदा रहेगा ?
 

डॉ पवन विजय 

Tuesday, July 15, 2014

मीरजापुर और वाराणसी की "कजरी";

उत्तर प्रदेश के प्रचलित लोकगीतों में ब्रज का मलार, पटका, अवध की सावनी, बुन्देलखण्ड का राछरा, तथा मीरजापुर और वाराणसी की "कजरी"; लोक संगीत के इन सब प्रकारों में वर्षा ऋतु का मोहक चित्रण मिलता है| महिलाओं द्वारा समूह में प्रस्तुत की जाने वाली कजरी को "ढुनमुनियाँ कजरी" कहा जाता है| कजरी शब्द काजल से लिया गया है जिसे सुन्दरता बढाने के लिए आँखों में लगाया जाता रहा है | इसके इतिहास और उत्पत्ति से जुडी  बहुत से कहानियाँ हैं जिनमे एक ये है कि कजली नाम की एक लड़की  थी जिसका प्रेमी उसे छोड़ गया था उसने खुद को कज्मल नमक देवी को सपर्पित कर दिया था और प्रेमी की याद में उसे बुलाने के लिए गाया करती थी जिसे आज कजरी कहा जाता है |


हिन्दी फिल्मों में "कजरी" का मौलिक रूप कम मिलता है, किन्तु 1963 में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म "बिदेसिया" में इस शैली का अत्यन्त मौलिक रूप प्रयोग किया गया है| इस कजरी गीत की रचना अपने समय के जाने-माने लोकगीतकार राममूर्ति चतुर्वेदी ने और संगीतबद्ध किया है एस.एन. त्रिपाठी ने| यह गीत महिलाओं द्वारा समूह में गायी जाने वाली "ढुनमुनिया कजरी" शैली में मौलिकता को बरक़रार रखते हुए प्रस्तुत किया गया है| इस कजरी गीत को गायिका गीत दत्त और कौमुदी मजुमदार ने अपने स्वरों से फिल्मों में कजरी के प्रयोग को मौलिक स्वरुप दिया है| आप यह मर्मस्पर्शी "कजरी" सुनिए|


सावन का महीना आते ही गाँव में झूले पड़ जाया  करते हैं और लड़कियां  मिल के इस गीत का आनंद लेती हैं |

हमारे गांव में इस समय महिलाये झूले पर बैठ कजरी गा रही होंगी।,,,,, डॉ पवन विजय|


हमारे गांव में इस समय महिलाये झूले पर बैठ कजरी गा रही होंगी।,,,,, डॉ पवन विजय

हमारे गांव में इस समय महिलाये झूले पर बैठ कजरी गा रही होंगी। पेंग मारे जा रहे होंगे। हलकी बारिश में भीगे ज्वान नागपंचमी की तैयारी में अखाड़े में आ जुटे होंगे और मैं यहाँ ७०० किलोमीटर दूर कम्प्यूटर तोड़ रहा हूँ। खैर आप लोग लोकभाषा में लिखे इस गीत और भाव को देखिये। 
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हमका मेला में चलिके घुमावा पिया 
झुलनी गढ़ावा पिया ना। 

अलता टिकुली लगइबे 
मंगिया सेनुर से सजइबे, 


हमरे उँगरी में मुनरी पहिनावा पिया

मेला में घुमावा पिया ना।


हँसुली देओ तुम गढ़ाई
चाहे कितनौ हो महंगाई,

हमे सोनरा से कंगन देवावा पिया
हमका सजावा पिया ना।

बाला सोने के गढ़इबे
चांदी वाली करधन लइबे,

छागल माथबेनी हमके बनवावा पिया
झुमकिउ पहिनावा पिया ना।

कड़ेदीन की जलेबी
रसमलाई औ इमरती,

एटमबम्म तू हमका लियावा पिया
बरफी खियावा पिया ना।

गऊरी शंकर धाम जइबे
अम्बा मईया के जुड़इबे ,

इही सोम्मार रोट के चढावा पिया
धरम तू निभावा पिया ना। 


Saturday, July 12, 2014

पूर्वांचल की शक्तिपीठ मां शीतला चैकियां हुयी गुरू पूजा|

जौनपुर। पूर्वांचल की शक्तिपीठ मां शीतला चैकियां धाम में पंडित सीताराम शरण जी महाराज के सानिध्य में गुरू पूजा का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने माथे पर तिलक लगाकर एवं गुरू का पैर जल से धूल कर ग्रहण किया। वहीं महाराज जी ने कहा कि मां-बाप एवं गुरू के चरणों में चारों धाम हैं। गुरू का महत्व ईश्वर प्राप्ति के सम्बन्ध से है। गुरू की कृपा से ईश्वर की प्राप्ति होती है। उनमें गुरूत्व शक्ति ब्रह्म से प्राप्त रहती है। उस शक्ति के सम्बन्ध से उतने अंष में ही परब्रह्म हैं। दिव्य गुण उत्पन्न करने से ब्रह्मा भक्ति प्रदान द्वारा शिष्य का पालन करने से विष्णु मोहादि दुर्गुणों के संहार करने से गुरू शिव रूप है और लगभग 50 लोगों ने गुरू मंत्र भी लिया। अन्त में गुरू का भण्डारा भी ग्रहण किया। इस दौरान महाराज जी के मुखारों से सीताराम-सीताराम के धुन पर सारे शिष्य थिरके। संगीत पर बैठे त्रिजुगी त्रिपाठी, बबलू मिश्रा, गप्पू प्रजापति, भानु त्रिपाठी ने जमकर संगीत का साथ दिया। अन्त में जनपद आजमगढ़ के ठेकमा, महराजगंज, चैकियां धाम, दीदारगंज के तमाम भक्तों ने गुरू मंत्र ग्रहण किया। इस अवसर पर गोपाल जी, नेता भइया, गणेष गुप्ता, सुरेन्द्र गिरि, कलाकार आशिष माली, राहुल त्रिपाठी सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

डॉ मनोज मिश्र प्राचीन संस्था संस्कार भारती द्वारा सम्मानित |


जौनपुर ,१२ जुलाई। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर जौनपुर की ख्यातिलब्ध एवं प्राचीन संस्था संस्कार भारती नें डॉ मनोज मिश्र को शिक्षा के शोध ,वैज्ञानिक चेतना प्रचार -प्रसार एवं लोक संगीत के सरंक्षण के क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया। आदि गंगा गोमती के सुरम्य तट, विसर्जन घाट पर नवदुर्गा- शिव मंदिर पर संस्कार भारती द्वारा आयोजित नटराज पूजनोत्सव के अवसर पर जनपद के संभ्रांत जनों के बीच डॉ मनोज मिश्र को श्रीफल ,प्रशस्तिपत्र ,शाल एवं मिष्ठान प्रदान कर सम्मानित किया गया। बताते चलें कि डॉ मनोज मिश्र बख्शा थानान्तर्गत ग्राम पँचायत चुरावनपुर के निवासी है एवं वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक हैं|

संस्कार भारती जौनपुर इकाई द्वारा नगर के नखास स्थित नवदुर्गा शिव मंदिर के प्रांगण में रविवार को गुरू पूर्णिमा के अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस मौके पर कला के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित किये गये प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित उक्त मंदिर के प्रांगण में आयोजित समारोह में संस्था द्वारा लोक गायक बजरंगी सिंह, साहित्य लेखक डा. मनोज मिश्र, संगीत शिक्षिका डा. प्रीति उपाध्याय एवं तलवारबाजों के प्रशिक्षक लालजी निषाद को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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