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Thursday, November 27, 2014

कन्या बचाओ अभियान के तहत हरियाणा में जौनपुर का हुआ नाम रौशन |

जौनपुर। जौनपुर के कलाकारों ने गत दिवस दिल्ली व हरियाणा में आर्ट आफ लिविंग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपना परचम लहरा दिया जिनको कार्यक्रम में उपस्थित आध्यात्म गुरू श्री श्री रविशंकर एवं हरियाणा के मुख्यमंत्री एमएल खट्टर ने आशीर्वाद दिया। वहां से लौटे कलाकारों के भूमिका सलमान शेख ने बताया कि बीते 17 से 22 नवम्बर तक कन्या बचाओ अभियान के तहत आर्ट आफ लिविंग के बैनर तले नुक्कड़ नाटक किया गया।

 श्री शेख के अनुसार उनके ग्रुप के बच्चों ने नाटक, नृत्य नाटिका, फ्लैसमाब के माध्यम से दिल्ली, हरियाणा के रेवाड़ी, पानीपत में अभियान के बारे में लोगों को जागरूक किया। 23 नवम्बर को हरियाणा के रेवाड़ी में स्थित हिन्दू हाईस्कूल माॅडल टाउन के मैदान पर आयोजित समारोह में श्री श्री रविशंकर जी एवं मुख्यमंत्री एमएल खट्टर ने आशीर्वाद दिया जहां स्वयं सलमान शेख सहित शेरू, अमन, दीपचन्द, डब्लू, विशाल, राजेश व पंकज ने लोगों को ताली बजवाने पर मजबूर कर दिया। अन्त में उपरोक्त हस्तियों ने सभी कलाकारों के कार्यों को सराहा। उक्त अवसर पर ग्रुप की संचालिका मीनाज शेख, रेवाड़ी एसपी हामिद अख्तर, एमएलए सुबाष चूक, समाजसेवी वीके भारद्वाज, स्वामी जयंत सहित अन्य उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया को पहले जानिये पहचानिए फिर सहयोग लीजे और तब इस्तेमाल कीजे | एस एम् मासूम

जौनपुर मेरा वतन है मेरी पहचान है और यहाँ के लोगों से मुझे प्रेम है इसीलिये मैंनेअपनी व्यस्ततासे समय निकाल के जौनपुर की पहली द्वीभाषीय वेबसाइट बनायीं और कोशिश करता रहा की इसकी अहमियत को वहां के लोग पहचाने और वो भी अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुंचा सकें | जौनपुर के लोगों ने मुझे बहुत ही प्यार दिया और मेरे विचारों का स्वागत भी किया|  कई नए मित्र बने नए अच्छे लोग संपर्क मैं आये  ,जिनके बारे मैं जल्द ही लिखूंगा|

अक्सर देखा ये गया है की लोग अपना ज्ञान किसी और को मुफ्त में नहीं देते और देते भी हैं तो गुरु अपने पास कुछ ऐसे हुनर बचा के रखता है जिस से लोगों का उनके पास आना जाना बना रहे क्यूँ की आज का इंसान तो इस्तेमाल करो और फ़ेंक दो में विश्वास रखता है |


मैं जौनपुर जब जब आया किसी न किसी को ब्लॉग ,वेबसाईट बनाने का हुनर सिखाता गया जिनमे से बहुतों ने उसे सीखा और समय दिया बहुतों ने मेरी मेहनत और धन को बर्बाद किया और बहुतों ने मुझे न समझ समझ के इस्तेमाल करने की कोशिश की | मैं आगे बढ़ता गया हुनर सिखाता गया कुछ खट्टे कुछ मीठे तजुर्बे हासिल करता गया |

जिसे अंतरजाल पे फैले सोशल मीडिया की अधिक जानकारी नहीं और शौक़ उसके इस्तेमाल का हो तो मामला ऐसा ही बनता है की साइकिल ठीक से चलानी आती नहीं और मोटर साइकिल पे दौड़ने का शौक़ हो | अज्ञानता आज के ऐसे युग में जहां इंसान इंसान पे विश्वास नहीं करता , धोका देता है,इस्तेमाल करता है अधिकतर शक को भी जन्म देती है | मेरे साथ इन्ही कारणों से बहुत बार मुश्किल भी आई |


इसलिए मेरा ये पैगाम है पहले जानिए अंतरजाल है क्य?ये आभासी दुनिया है और यहाँ सब कुछ एक कनेक्शन पे निर्भर करता है और इसकी भाषा पे निर्भर करता है | महीनो की मेहनत से एक वेबसाईट बनती भी है और एक सेकेंड में ख़त्म भी हो जाती है अगर आपसे ज़रा सी चूक हुयी तो | 

जब भी मैंने किसी को समय दे के मुफ्त में ब्लॉग बनाना या वेबसाइट चलाना सीखाया उसने मुझसे तो नहीं लेकिन औरों से ये सवाल अवश्य किया की मासूम जी का इसमें क्या फायदा ? कुछ तो फायदा अवश्य है | ऐसा इसलिए उसने किया क्यूँ की आज के समय में वतन से प्रेम और वतन वालों को आगे बढ़ते देखने की बातें केवल लेखों और किताबों में मिलती हैं हकीकत में कम ही पायी जाती हैं |

उसके बाद सवाल ये की कितना पैसा लगता है इसी बनाने में और जब मैंने  बाज़ार के रेट से ९०% कम दाम में उनका आम कर दिया तो उन्हें फिर लगा अरे ऐसा कैसे ? ये कुछ बेवकूफ बना रहे हैं |ऐसा इसलिए की अविश्वास की हालत में वे जगह जगह मशविरा लेते हैं और हर इंसान अपने अपने ताल्लुकात और इर्ष्या  इत्यादि से प्रेरित हो के सलाह भी दिया करता है |

मेरी ख्वाहिश है की जौनपुर अंतरजाल पे हर जगह अलग अलग रूप में नज़र आये और एक दिन ऐसा भी आये की पर्यटक भारत में आने के पहले जौनपुर को भी एक बार देखने की ख्वाहिश करें |

आज कल मैं हर दिन कोई ना कोई फ़ोन अवश्य रिसीव करता हूँ जिसमे ये कहा जाता है मेरी वेबसाईट बना दें मुझे सीखा दें | मैं जब जब जौनपुर आऊंगा ये ज्ञान लोगों को अवश्य दूंगा लेकिन इसी सीखने के पहले वेबसाईट क्या है और इसकी बारीकियां क्या है इसे अवश्य समझ  लें |

एस एम् मासूम

Wednesday, November 26, 2014

मिलिए फिल्म जगत के जौनपुरी धुरंधरों से | योगेश नारंग


योगेश नारंग अपने ख़ास अंदाज़ में |

फिल्म जगत में जौनपुरी कलाकारों ने अपनी एक जगह  बनायी हुयी हैं जिन्हें समय समय पे हमारा जौनपुर से पेश किया जाता रहा है | एक्टरों को तो अक्सर लोग जान ही जाते हैं लेकिन उन कलाकारों के बारे में कम ही जान पाते हैं जो परदे के पीछे रहा करते हैं |

आज आपको मिलवाते हैं फिल्म जगत के मशहूर चलचित्रकार (cinematographer) जनाब योगेश नारंग साहब से जिनसे मुलाक़ात और बात चीत करने पे एहसास हुआ जौनपुर की माटी में ऐसे कशिश है की जौनपुरी दुनिया में कहीं भी चला जाए उसे जौनपुर की याद हमेशा आती रहती है |

योगेश नारंग जी ने शुरूआती पढ़ाई जौनपुर से पूरी  की और उसके बाद मुंबई का रुख किया जहां उन्होंने जहां बाकायदा cinematographer का course किया और फिल्म जगत में अपनी किस्मत आजमाने लगे | उन्होंने अपनी शुरुआत चलचित्रों और छोटी फिल्मों से की और आज कामयाबी हासिल की | बहुत से विज्ञापन कंपनियों के लिए भी जनाब योगेश नारंग साहब काम करते है |

फिल्मो में कामयाबी के बावजूद उनमे न घमंड है और ना ही वतन की मुहब्बत कम हुई दिखती है | हमारा जौनपुर उनकी और तरक्की की कामना करता है और आशा करता है अपने वतन जौनपुर का नाम ऐसे ही रोशन करते रहेंगे |

योगेश नारंग जी की यह शोर्ट फिल्म अवश्य देखें "कौन"




योगेश नारंग और जौनपुरी कहानीकार जनाब कैस जौनपुरी से मुंबई में मेरे घर पे एक बात चीत जिसे आप कह सकते हैं जौंपुरियों के फुर्सत के वक़्त में वतन की याद के कुछ पल |




योगेश नारंग और जौनपुरी कहानीकार जनाब कैस जौनपुरी के साथ फुर्सत के कुछ पल |



फिल्म जगत से मेरा रिश्ता बड़ा पुराना रहा है और यहाँ पे जौनपुरी कलाकारों को देख के एक ख़ुशी सी महसूस होती है | जल्द ही आपके सामने और कलाकारों को पेश किया जाएगा| आभार . एस एम् मासूम 

बोगस मतदाताओं का नाम बाहर करने के मामले में जौनपुर ने रिकार्ड कायम किया |

जौनपुर।  मतदाता सूची से बोगस मतदाताओं का नाम बाहर करने के मामले में जौनपुर ने रिकार्ड कायम कर दिया है। जिले की नौ विधानसभा क्षेत्र से दस लाख से ज्यादा बोगस मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए है। इसमें सात लाख से ज्यादा नामों को अब तक साफ्टवेयर से भी हटाया जा चुका है, जबकि सूबे के अन्य जिले इस मामले में काफी पीछे है।

जिले में चल रहा मतदाता पुननिरीक्षण अभियान बीते दिनों समाप्त हो गया। करीब महीने भर से ज्यादा चले अभियान के दौरान जिले के नौ विधानसभा की मतदाता सूची का पुननिरीक्षण बीएलओ के माध्यम से कराया गया। इसमें सभी विधानसभा क्षेत्रों से मिलाकर दस लाख 253 बोगस मतदाताओं का नाम सूची से काटा गया जिसकी संशोधित सूची भी बीएलओ द्वारा उच्चाधिकारियों को उपलब्ध करा दी गई है। इसकी आयोग के साफ्टवेयर पर मिटाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

आंकड़ों पर नजर करें तो अबतक सभी तहसीलों को मिलाकर सात लाख 48 हजार 59 बोगस मतदाताओं का नाम भी सूची से मिटा दिया गया है। वहीं प्रदेश आंकड़ों में इस मामले में खीरी जनपद दूसरे स्थान पर है जिसने महज 52 हजार 961 बोगस मतदाताओं का नाम सूची से बाहर किया है, जबकि इस मामले में इलाहाबाद तीसरे और वाराणसी 16वें स्थान पर है।

Tuesday, November 25, 2014

खालिस मुखलिस मस्जिद जिसे चार ऊँगली मस्जिद भी कहते हैं |

पुराने जौनपुर के दरिया किनारे के कुछ इलाके शर्की लोगों की ख़ास पसंद रहे थे | पानदरीबा रोड पे आपको पुराने समय की बहुत सी इमारतें मिलेंगी जिनमे से बहुत से इमामबारगाह जो इमाम हुसैन (अ.स) की याद में बनाए गए थे ,मिलेंगे | यहाँ पान दरीबा रोड पे मकबरा सयेद काजिम अली से सटी हुई एक मस्जिद मौजूद है जिसे खालिस मुखलिस या चार ऊँगली मस्जिद कहते हैं | शर्की सुलतान इब्राहिम शाह के दो सरदार इस इलाके में आया जाया करते थे कि एक दिन उनकी मुलाक़ात जनाब सैयेद उस्मान शिराज़ी साहब से हुई जो की एक सूफी थे और इरान से जौनपुर दिल्ली होते हुए आये थे और यहाँ की सुन्दरता देख यहीं बस गए | सयेद उस्मान शिराज़ी साहब से यह दोनों सरदार खालिस मुखलिस इतना खुश हुए की उनकी शान में इस माजिद की तामिल करवायी | जनाब उस्मान शिराज़ी की कब्र वहीं चार ऊँगली मस्जिद के सामने बनी हुई है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं |जनाब उस्मान शिराज़ी के घराने वाले आज भी पानदरीबा इलाके में रहते हैं जिनके घर को अब मोहल्ले वाले “मीर घर “ के नाम से जानते हैं |









वैसे तो यह मस्जिद आज पुरातत्व विभाग की देख रेख में हैं लेकिन इसके पीछे का हिस्सा गिर चूका है और आज भी इसे मरम्मत की ज़रूरत है | वहाँ तलाशने पे भी पुरातत्व विभाग का कोई केयर टेकर नहीं मिला | इस मस्जिद में बाएँ हाथ की तरफ की दीवार में एक चार ऊँगल का पत्थर लगा है जिसमे बारे में यह मशहुर है कि पहले इसे कोई भी नापे तो यह चार ऊँगल ही आता था लेकिन अब ऐसा नहीं है |यहाँ के बारे में इसके सामने के मोहल्ले सोनी टोला के लोग बहुत से बातें बताते हैं जो की इतिहास में नहीं मिलती | जैसे कोई कहता है यहाँ अंग्रेजों ने गोली चलायी उसी के बाद से यह पत्थर अब चार ऊँगल सब के नापने पर नहीं आता | कोई कहता है मस्जिद में मछली और घोडा बना है | ऐसा प्रतीत होता है की यह मछली और घोड़े के निशाँ बाद में बनाई गएँ हैं लेकिन उनसे कोई बात कही जा रही है |

मस्जिद की दीवारों पे बने अजीब निशान ,घोडा ,मछली और तीर

इन कहानियों की सत्यता तो प्रमाणित नहीं लेकिन यह अवश्य बताता है की यह एक बहुत ही मशहुर मस्जिद है| यहाँ रमजान के महीने में मोहल्ले के शिया मुस्लिम इफ्तार का इंतज़ाम किया करते हैं और नमाज़ होती है | तथा मुहर्रम के महीने में इलाके के लोग मजलिस ऐ हुसैन किया करते हाँ |

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