Monday, September 1, 2014

सैंयां काहे बसे बिदेस ? -डॉ किरण मिश्र



एक साल में दो बार स्थानांतरण उससे पहले अपनी नौकरी की व्यस्तता के चलते दो वर्ष बाद गाँव  जाने का मौका तलाश कर पाई। हमेशा की तरह  गाँव की सभी वरिष्ठ व कनिष्ठ  महिलाये मुझसे मिलने आई मुझे उनसे मिलना हमेशा अच्छा लगता है। पर इस बार भी मैं उनसे मिलके उदास हूँ क्योंकि उनकी आर्थिक दशा  साल दर साल बद से बदतर होती जा रही है।  


आम अमरुद और आंवले के बगीचों से घिरा है मेरा छोटा सा गाँव जिला जौनपुर में पड़ता है। मुंगरा बादशाहपुर से जरा आगे बढ़ते ही हमारा गाँव आ जाता है । राष्टीय स्वतंत्रता आंदोलन में पुरे जौनपुर की ही तरह हमारे  गाँव ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था १९४२ के आंदोलन में यहां थाने को फूंक कर साथी कैदियों को छुड़ाने में  हमारे  ताऊजी  भी शामिल थे। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम शिरोमणि दूबे ताउजी के गहरे मित्र थे। स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरण यहाँ बिखरे पड़े है। 


जौनपुर की धरती राम जी की धरती है। आपस में मिलने पर  जै राम जी की कहा जाता है। राम के जीवनदर्शन को अंतरमन में समाये संयमित जीवन जीते इन लोगो को जब में देखती हूँ तो मन मैं विचार आता है सारे देश को खाना खिलाने वाले ये किसान खुद अपने लिए दो जून के खाने का इंतजाम क्यों नहीं कर पा रहे है। कर्ज से दबे ये किसान मृतक के समान जीवन  क्यों जी  रहे है।  इन किसानो को शहरों की और पलायन ना सिर्फ इन्हे परम्पराओ से दूर करता है बल्कि शहरों की चकाचौंध में फस कर अनेको प्रकार की बुराईयो  और  अनेको लाइलाज बीमारियों से जकड जाता  है। ये समस्या  ना सिर्फ मेरे गाँव  की है बल्कि  पूरे  देश  की  है। सवाल ये उठता है की इसके लिए सरकार की नीतिया क्या होनी चाहिए जवाब बहुत से हो सकते है परन्तु अब नीतियों और जवाब से काम नहीं चलेगा सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। कुछ सुझाव मैं दे रही हूँ 


१. छोटे किसानो के लिए खेती के समान्तर रोजगार की व्यवस्था होनी चाहिए 
२. लघुउद्योगो को प्रोहत्सान वा कच्चे माल के लिए बिना ब्याज के रकम 
३. गाँव  में कृषि वा कृषि सम्बन्धी उधोगधंधो की स्थापना 

ये उपाय और भी हो सकते है इनसे कृषि का विकास तो होगा ही परम्परायें  भी जीवित रहेगी और शहरों की तरफ पलायन भी रुकेगा जो शहर के बोझ को कम करेगा कुल मिलाकर सरकार को बहुस्तरीय रोजगार किसानो को उपलब्ध करना ही चाहिए। ऐसा ना हो कि भारत से कृषि का वा कृषक दोनों ही ख़त्म हो इतिहास में समा जाए।  

------डॉ किरण मिश्र 



सापों के प्रति फैले अन्धविश्वास उन्मूलन के लिए जनजागरूकता |


जौनपुर. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा सापों के प्रति फैले अन्धविश्वास एवं अवैज्ञानिकता के उन्मूलन के लिए विद्यार्थियों के बीच जनजागरूकता के लिए कार्यक्रम का आयोजन संकाय भवन में किया गया.इस अवसर पर  सर्प विशेषज्ञ नौपेडवा बाजार  निवासी मुरारी लाल ने इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जहरीले सांप करैत और कोबरा का प्रदर्शन किया.

जंतु विज्ञानी डॉ वंदना राय ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत के मैदानी भागों में मुख्यतः चार प्रकार के जहरीलें सर्प किंग कोबरा, करैत , कोबरा और वाइपर पाए जाते है.वर्ष में अप्रैल से लेकर वर्षा ऋतु सितम्बर तक सापों का प्रजनन काल होता है ऐसे में सर्प स्वभाव से ही उग्र हो जाते है. हमारी जरा सी असावधानी हमें संकट में डाल सकती है.सर्प दंश पीड़ित को सदैव भरोसा दे कि खतरे की कोई बात नहीं है.सर्प दंश पीड़ित को  भाग दौड़ से बचाना चाहिए एवं चिकित्सक के पास जाकर एंटी स्नेक वेनम सीरम इंजेक्शन लगवाना चाहिए.


जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डॉ मनोज मिश्र ने कहा कि हमारे समाज में सापों को लेकर बहुत कपोल – कल्पित भ्रांतियां है.मसलन सांप दूध पीते है, शहनाई और बीन की धुनपर नाचते है, सांप मणिधारी होते है,सिरपर बाल होते है और पांच फन वाले सांप भी होते है.


सर्प विशेषज्ञ नौपेडवा बाजार  निवासी मुरारी लाल ने इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जहरीले सांप करैत और कोबरा का प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थियों को उनकी पहचान कराई.उन्होंने कहा कि सर्प दंश होने पर ओझा, सोखा, जड़ी बूटी एवं किसी अन्य अंधविश्वास  में न पड़कर इन जहरीले सापों के काटने पर प्राथमिक उपचार कर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.उन्होंने कहा कि गाँव के लोग खेतों में घास या खेती का काम करते समय, घर की महिलाएं उपली लेते समय एवं अनाज निकालते समय सतर्क होकर काम करें. संध्या काल में तालाबों और जल स्रोतों के पास सावधानी बरतनी चाहिए.

विभागाध्यक्ष डॉ अजय प्रताप सिंह नें सर्प विशेषज्ञ मुरारी लाल से  इस अभियान को जारी  रखने की अपील की और कहा कि जागरूकता से ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है .
कार्यक्रम का संयोजन डॉ दिग्विजय सिंह राठौर नें किया .इस अवसर पर डॉ सुनील कुमार ,डॉ रुश्दा आजमी ,आनंद सिंह समेत विभिन्न संकाय के विद्यार्थी मौजूद रहे

Saturday, August 30, 2014

एक पुलिसवाले का दर्द पुलिसवाले की ज़बानी |


कमलेश सिंह 
एक पुलिसवाले का दर्द 

मन तो मेरा भी करता है मॉर्निग वॉक पर जाऊं मैं,

सुबह सवेरे मालिश करके थोड़ी दंड लगाऊं मैं,

बूढ़ी मॉ के पास में बैठूं और पॉव दबाऊँ मैं

लेकिन मैं इतना भी नही कर पाता,
क्योंकि मैं वो मानव हूँ जो मानव नही समझा जाता

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हमने बर्थ डे की पिघली हुई मोमबत्तियॉ देखी है,

हमने पापा की राह तकती सूनी अंखियाँ देखी हैं,

हमने पिचके हुए रंगीन गुब्बारे देखे हैं,
पर बच्चे के हाथ से मैं केक नही खा पाता,
क्योंकि मैं वो मानव हूँ जो मानव नही समझा जाता 

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निज घर करके अंधेरा सबके दिये जलवाये हैं,

कहीं सजाया भोग कहीं गोवर्धन पुजवायें हैं,

और भाई बहिन को यमुना स्नान करवाये हैं,
पर तिलक बहिन का मेरे माथे तक नही आ पाता,
क्योंकि मैं वो मानव हूँ जो मानव नहीं समझा जाता
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हमने ईद दिवाली दशहरा खूब मनाये हैं,
रोज निकाले जुलूस और गुलाल रंग बरसाए हैं,
ईस्टर,किर्समस,वैलेंटाइन और फ्राइडे मनाये हैं,
पर मैं कोई होलीडे संडे नही मना पाता,
क्योंकि मैं वो मानव हूँ जो मानव नहीं समझा जाता
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जाम आपदा फायरिंग या विस्फोट पर आना है,
सब भागें दूर- दूर पर हमें उधर ही जाना है,
रोज रात में जागकर आप सबको सुलाना है,
पर मैं दिन में कभी दो घंटे नहीं सो पाता,
क्योंकि मैं वो मानव हूँ जो मानव नहीं समझा जाता
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जिन्हें अपनों ने ठुकराया वो सैकड़ो अपनाये हैं,
जिन्हें देखकर अपने भागे हमने वो भी दफनाये हैं,
कई कटे-फटे, जले- गले, अस्पताल पहुंचाए हैं,
कई चेहरों को देखकर मैं खाना नहीं खा पाता,
क्योंकि मैं भी मानव हूँ पर मानव नहीं समझा जाता
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घनी रात सुनसान राहों पर जब कोई जाता है,
हर पेड़ पौधा भी वहॉ चोर नजर आता है,
कड़कड़ाती ठंड में जब रास्ता भी सिकुड़ जाता है,
लेकिन पुलिया पर बैठा सिपाही फिर भी नही घबराता,
क्योंकि यह वो मानव है जो मानव नही समझा जाता
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नहीं चाहता मैं कोई सम्मान दिलवाया जाय,
नही चाहता हमें सिर आँखों पर बैठाया जाय,
चाहत है बस हफ्ते में एक छुट्टी मिल जाय,
कभी हमारी तरफ भी कोई प्यारी नजर उठ जाय,
हम भी मानव हैं और हमें बस मानव समझा जाय|

साभार कमलेश सिंह 

राजा जौनपुर से एक बात चीत |-- जौनपुर के शाही घराने -1

मेरा ताल्लुक जौनपुर के मशहूर ज़मींदार ज़ुल्क़द्र खान बहादुर के घराने से होने के कारण ,बचपन से राजा जौनपुर के बारे में और उनके अपने घर आने जाने के बारे में सुना करता था लेकिन कभी राजा जौनपुर की हवेली की तरफ जाने का अवसर नहीं मिला था | इस बार मैं इस बात का ज़िक्र अपने मित्र जनाब वेकार खान साहब से किया तो वो राजा जौनपुर के महल मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो गए | सुबह साढ़े नौ बजे हम लोग राजा जौनपुर के महल पहुँच गए लेकिन उनके मिलने का समय पहले से ना मालूम होने के कारण ११ बजे तक राजा साहब के बाहरी कमरे में इंतज़ार करना पड़ा |

राजा साहब करीब ११ बजे आये और अपने दफ्तर में उनसे बात चीत शुरू हुई | उन्होंने बताया की जौनपुर रियासत की स्थापना ०३/११/१७९७ में हुई और वो इस रियासत के १२ वें राजा है | राजा अवनींद्र दत्त से इस मुलाक़ात से जौनपुर रियासत की काफी जानकारी हासिल हुई और मैं खुद राजा अवनींद्र दत्त जी का उनके सहयोग के लिए आभारी हूँ |

जौनपुर रियासत की स्थापना तीन नवंबर १९९७ में शियो लाल दुबे जी ने की जो एक धनी बैंकर श्री मोती लाल दुबे के पुत्र थे | शिव लाल दुबे जी अमौली फतेहपुर के रहने वाले थे |१७९७ में उन्हें ताल्लुका बदलापुर “राजा बहादुर “ के खिताब के साथ मिला | उनकी म्रत्यु 90 वर्ष की आयु में सन १८३६ में हो गयी ,उस समय रायपुर राज्य आजमगढ़,बनारस,गोरखपुर,मिर्ज़ा पुर तक पहिल चुकी थी | राजा शिव लाल दत्त की म्रत्यु के बाद उनके पौत्र राजा राम गुलाम जी ने राज्य का काम काज संभाला जबकि उनके पिता राजा बाल दत्त जी अभी जिंदा थे |

राजा राम गुलाम जी की म्रत्यु सन १८४३ में हुई और उनके पिता राजा बाल दत्त ने राज्य की ज़िम्मेदारी संभल ली |रजा बाल दत्त के बाद उनके दुसरे पुत्र लछमन गुलाम राजा बने लेकिन उनकी कोई संतान न होने के कारण सन १८४५ में राजा बाल दत्त की पत्नी रानी तिलक कुंवर के साथ में राज पाट का काम आ गया |

१९१६ में राजा श्री कृष्ण दत्त १९४४ में राजा यद्वेंदर दत्त १९९९ में आज के राजा अवनींद्र दत्त इस राज्य की देख भाल कर रहे हैं |






 जौनपुर रियासत (स्थापना ०३/११/१७४७)

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रजा शिव लाल दत्त पत्नी रानी खेम कुंवर और रानी राम कुंवर

जन्म १७४६ म्रत्यु २९/०१/१८३६- 90 वर्ष

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राजा बाल दत्त पत्नी रानी तिलक कुंवर 

म्रत्यु १८४४

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म्रत्यु १८४३

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राजा लछमन गुलाम पत्नी रानी प्रेम कुंवर

म्रत्यु १८४५

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राजा हरी गुलाम पत्नी रानी राम कुंवर

म्रत्यु १८५७

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राजा शिव गुलाम पत्नी रानी जशोदा कुवर

म्रत्यु १८५८

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राजा लछमी नारायण पत्नी गुलाब कुंवर

म्रत्यु १८७५

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राजा हरिहर दत्त पत्नी रानी शाहोद्र कुंवर

म्रत्यु १८९२

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राजा शंकर दत्त पत्नी रानी गुमानी कुंवर

म्रत्यु १८९७

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राजा श्री कृष्ण दत्त पत्नी रानी इश्वरी कुंवर

जन्म १८९६ -म्रत्यु १९४४

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राजा यादवेन्द्र दत्त पत्नी रानी दयावती कुंवर

जन्म १९१८ म्रत्यु १९९९

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राजा अवनींद्र दत्त पत्नी रानी नीता कुंवर

जन्म १९४७ 





Friday, August 29, 2014

गाजीपुर हुआ पराजित जौनपुर से |


जौनपुर: तिलकधारी इंटर कालेज के मैदान पर आयोजित मंडलीय हैंडबाल प्रतियोगिता के बालक व बालिका वर्ग में मेजबान जौनपुर चैंपियन रहा। गाजीपुर को उपविजेता का खिताब मिला।

बालक वर्ग का पहला सेमीफाइनल मेजबान जौनपुर व वाराणसी के बीच खेला गया। जिसमें जौनपुर ने वाराणसी को 15-07 के अंतर से पराजित किया। वहीं वाई के आधार पर गाजीपुर ने सेमीफाइनल में स्थान हासिल कर लिया। फाइनल मैच में जौनपुर ने गाजीपुर को 10-05 से पराजित कर खिताब पर कब्जा जमा लिया। बालिका वर्ग में भी जौनपुर ने गाजीपुर को 3-1 से पराजित कर ट्राफी पर कब्जा जमा लिया। निर्णायक का दायित्व राजीव कुमार सिंह व निखिल सिंह ने निभाया। स्कोरर अभिषेक राय रहे।

मुख्य अतिथि सह जिला विद्यालय निरीक्षक राम हुजूर प्रसाद ने प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए कहा कि खेल का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। इससे हमारा शारीरिक विकास होता है। इस अवसर पर प्रबंधक सत्य प्रकाश सिंह, हृदय कुमार सिंह, रमेश चंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, दशरथ यादव, शिक्षक नेता रमेश सिंह, जिलाध्यक्ष डा.राकेश सिंह, जिलामंत्री डा.प्रमोद श्रीवास्तव, जिला क्रीड़ा कोषाध्यक्ष राजेश मिश्र, प्रधानाचार्य डा.जंग बहादुर सिंह, डा.सुबाष सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन रमेश चंद्र सिंह तथा क्रीड़ाध्यक्ष हृदय कुमार सिंह ने आभार जताया।

Thursday, August 28, 2014

‘मेरा खाता भाग्य विधाता ‘‘ का शुभारम्भ


जौनपुर। जिलाधिकारी सुहास एलवाई की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट प्रेक्षागृह में आज प्रधानमंत्री द्वारा घोषित प्रधानमंत्री जन-धन योजना ‘‘मेरा खाता भाग्य विधाता ‘‘ का शुभारम्भ सायं किया गया।

क्षेत्रीय प्रबन्धक सुनील त्यागी ने बताया कि आज ही  प्रधानमंत्री द्वारा खाता खोलने वाले व्यक्ति को एक लाख रू0 का दुघटना बीमा, कोई न्यूनतम राशि की आवश्यकता नही, 6 माह तक संतोषजनक परिचालन के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा,पेंशन बीमा इत्यादि का लाभ मिलेगा। ये बैंक खाते साधारण दस्तावेज जैसे मतदाता पहचान पत्र/आधार कार्ड, राशनकार्ड, एक फोटो द्वारा खेले जायेगे।ये खाते बन्द नही किये जायेगे।एलडीएम एम0 पी0राय ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा आज ही घोषणा किया गया है कि आगे चलकर 30 हजार रू0 का सामान्य बीमा का लाभ मिलेगा।


उन्होंने कहा कि महिलाओं में बचत की प्रवृत्ति को देखते हुए उनके खाते अधिक से अधिक खोलवायें जाय। सांसद प्रतिनिधि मछलीशहर डाॅ0 विजयचन्द पटेल ने अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक खाता खोलवाने का आश्वासन दिया। मुख्य विकास अधिकारी पी0सी0श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी योजनाओं में ग्रामींणों के बैंक खाते खुलवाने से उनके खाते में सब्सीडी आदि की धनराशि भेजी जा सकती है। अध्यक्ष नगरपालिका दिनेश टण्डन ने इस योजना का हार्दिक स्वागत किया एवं पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलापंचायत अध्यक्ष श्रीमती शारदा दिनेश चैधरी ने इस योजना का लाभ जिले के गरीब ग्रामींण जनता को विशेष फायदेमंद होंगा।
       

कार्यक्रम के अध्यक्ष जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि जर्मन देश में नगरपालिका द्वारा अनुमति के बाद ही बच्चे का नामकरण किया जाता है। बच्चा पैदा होते ही बैंक पासबुक,पासपोर्ट,बीजा आदि मिल जाता हैं हमारे देश में 40 प्रतिशत लोगों का बैंक खाता नही है। जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित जन-धन योजना का जिले में सभी बैंकों द्वारा आज तक एक लाख खाता खोलकर देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई दिया है। क्षेत्रीय प्रबन्धक काशी गोमती संयुक्त ग्रामींण बैंक वी0के0पाण्डेय ने सभी अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। संचालन एलडीएम एम0पी0राय ने किया। इस अवसर पर विभिन्न बैंकों द्वारा सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के खाते खोलकर पासबुक मुख्य अतिथ्यिों द्वारा दिया गया। इस अवसर अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता, डीडीओ तेजप्रताप मिश्र,पीडी सत्येन्द्रनाथ चैधरी,नावार्ड प्रबन्धक सहित सभी बैंकों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।  बैंक प्रबन्धकोंद्वारा अतिथितियों का स्वागत बुके देकर किया गया।

Wednesday, August 27, 2014

पत्रकार और समाज के संजीदा लोग चलायें वन्य जीव जागरूकता मुहिम |- डॉ अरविन्द मिश्र

क्या आप हिरन और मृग के फर्क को जानते हैं ?

भारत में वन्य जीवों के प्रति आम लोगों की जानकारी का स्तर बहुत शोचनीय है।आश्चर्य की बात तो यह है कि वन्य जीवों के बारे में वन वभाग के अधिकांश उच्च अधिकारी भी कम जानकारी रखते हैं। सोनभद्र में एक समय विपुल वन्य जीव सम्पदा थी मगर अब हालत चिंताजनक है। कारण यही है कि एक तो हम वन्य जीवों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते और इस जानकारी के अभाव में उनके प्रति हमारे मन में कोई सकारात्मक आग्रह नहीं होता।

चीते भारत से कब का लुप्त हो चुके किन्तु आज भी अखबारों की सुर्खियां चीतों के खाल बरामद होने का दावा करती हैं। कारण है भार्गव साहब की डिक्शनरी जिसके एक पुराने संस्करण में टाईगर को चीता बताया गया था। दो पीढ़ियां टाईगर का अर्थ चीता ही जानती रहीं मगर वह बाघ(व्याघ्र ) है. किसी पत्रकार ने तमिल टाईगर्स को तमिल चीते का नामकरण क्या कर दिया यह हिन्दी पत्रकारिता में रूढ़ हो गया। जबकि होना तमिल व्याघ्र था। यहाँ सोनभद्र के कैमूर घाटी में काले मृग पाये जाते हैं मगर पत्रकारों और आम लोगों के बीच वह काला हिरन है -बल्कि समूचे यू पी में कई वनाधिकारी भी इसे हिरन ही कहते हैं। राजधानी लखनऊ में काले मृगों की मौत हुयी तो उसे काले हिरणों की मौत बताया गया।

हिरन(ऐन्ट्लर्स ) वह है जो अपने सींगों को हर वर्ष गिरा देता है और नयी सींगें उग आती है , जबकि मृगों (ऐंटीलॉप ) वह जिसमें सींगें गाय भैंसों की तरह आजीवन बनी रहती हैं , अब हिरणों और मृगों की कई प्रजातियां हैं। साँपों को लेकर कितने ही अनर्गल दुष्प्रचार मीडिया द्वारा भी होता रहा है। ये चंद उदाहरण हैं जो वन्य जीवों के बारे में हमारे जानकारी के शोचनीय स्तर को उजागर करता है।

मैं आज यह सब इसलिए लिख रहा हूँ कि जब हमें वन्य जीवों के बारे में सामान्य जानकारी भी नहीं है तो हम उनका संरक्षण क्या करेगें? इसलिए एक व्यापक वन्य जीव जागरूकता अभियान को चलाये जाने की जरुरत है। अब यह अभियान कौन चलाये ? मुख्य जिम्मेदारी वन विभाग की है मगर शायद वे अपने सरकारी रूटीन/ स्टीरियोटाइप से उबर नहीं पाते। आऊट आफ बॉक्स सोचने को न किसी को फुर्सत है और न ही उनकी नज़रों में जरुरत.

तब ? मीडिया समूह क्या कोई रूचि लेगें? वे आगे आएं तो एक वन्य जीवन रिपोर्टिंग / पत्रकारिता पर एक -दो दिवसीय कार्यशिविर पत्रकारों का जगह जगह करा सकते हैं। ताकि भ्रामक खबरे जन मानस में न जायँ। मेनस्ट्रीम पत्रकारिता जनमानस की जानकारी का एक बड़ा स्रोत है. हम गलत जानकारी से लोगों में जो भ्रम पैदा करते हैं या जिस जानकारी को उन तक ले जाते हैं चिरस्थाई बन जाती है जैसे आज भी बहुत से पत्रकारों को टाईगर का अर्थ चीता ही पता है।
मेरी अपील है कि वन्य जीवों के संरक्षण के लिए संजीदा लोग सामने आएं और एक वन्य जीव जागरूकता की मुहिम को आगे बढ़ाएं। कोई सुन रहा है?

जौनपुर पर्यटन

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