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    बुधवार, 31 मई 2017

    फलों का राजा रसीला आम -डॉ दिलीप सिंह


    आम एक ऐसा फल है जिसका नाम सुनते ही मुह में पानी आ जाता है | आम जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान है |इसे "कल्पवृक्ष" अर्थात् मनोवाछिंत फल देनेवाला भी कहते हैं |कालिदास ने इसका गुणगान किया है ,वेदों में आम को विलास का प्रतीक कहा गया है। कविताओं में इसका ज़िक्र हुआ और कलाकारों ने इसे अपने कैनवास पर उतारा। आम ही वह फल है जो पूरे भारतवर्ष में प्रथ्वी के स्वर्ग काश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और वर्षा हरियाली के स्वर्ग चेरापूंजी ,असम से लेकर सूखे एवं निर्जनता के स्वर्ग राजस्थान तक हर जगह मिलता है | अनुकूल जलवायु मिलने पर इसका वृक्ष 50-60 फुट की ऊँचाई तक पहुँच जाता है। आम के बिना कोई भी शुभकार्य ,मांगलिक या वैवाहिक कार्य अधुरा माना जाता है और अधिकांश हवन यज्ञ इत्यादि आम की ही लकड़ियों से होता है | नारियल की तरह आम भी एक बेहद पवित्र वृछ है जिसको हरा काटना नैतिक एव विधिक रूप से वर्जित है तथा उसका हर भाग ताना , पत्ती ,छाल , बौर, कच्चा टिकोरा, पका फल एवम जडें मनुष्य के किसी न किसी काम अवश्य आते हैं |


    आम मुख्यतः मानसूनी पौधा है जो की उष्ण आर्द्र जलवायु में उगता है | भारत के अलावा आम का पेड़ दुनिया के और देशों जैसे ब्राजील,ऑस्ट्रेलिया ,अमेरिका अफगानिस्तान इत्यादि में भी पाया जाता है लेकिन अधिकांश आम भारत में ही पैदा होता है | भारत के आम की विश्व भर में भरी मांग है | उद्यान में लगाए जानेवाले आम की लगभग 1,400 जातियों से हम परिचित हैं। इनके अतिरिक्त कितनी ही जंगली और बीजू किस्में भी हैं। दशहरी, लंगड़ा , हापूस,चौसा,सफेदा,मलीहाबादी,सिंदुरवा,,तोतोपुरी,कलमी, आदि विषय विख्यात आम हैं | आम के एक बौर से सौ आम तक फल सकते है |आम का वृक्ष बड़ा और खड़ा अथवा फैला हुआ होता है; ऊँचाई 30 से 90 फुट तक होती है। छाल खुरदरी तथा मटमैली या काली, लकड़ी कठीली और ठस होती है। इसकी पत्तियाँ सादी, एकांतरित, लंबी, प्रासाकार (भाले की तरह) अथवा दीर्घवृत्ताकार, नुकीली, पाँच से 16 इंच तक लंबी, एक से तीन इंच तक चौड़ी, चिकनी और गहरे हरे रंग की होती है; पत्तियों के किनारे कभी कभी लहरदार होते हैं। वृंत (एँठल) एक से चार इंच तक लंबे, जोड़ के पास फूले हुए होते है। आम के एक पेड़ की आयु १०० से १३० वर्ष तक हो सकती है |



    आम में अनेक औषधीय तथा दिव्या गुण होते हैं |आम के नियमित सेवन से त्वचा ,रक्त रोग और केसर भी ठीक हो सकता है ऐसा वैज्ञानिक शोध से पता चला है |आम में पाया जाने वाला पोटाशियम एवं अन्य रसायन ह्रदय रोग में रामबाण है जो ह्रदय आघातों से रक्त जमने तक की प्रक्रिया से बचाव करता है |पका आम बहुत स्वास्थ्यवर्धक, पोषक, और शक्तिवर्धक होता है। आम का मुख्य घटक शर्करा है, जो विभिन्न फलों में ११ से २० प्रतिशत तक विद्यमान रहती है। शर्करा में मुख्यतया इक्षु शर्करा होती है, जो कि आम के खाने योग्य हिस्से का ६.७८ से १६.९९ प्रतिशत है। ग्लूकोज़ व अन्य शर्करा १.५३ से ६.१४ प्रतिशत तक रहती है। अम्लों में टार्टरिक अम्ल व मेलिक अम्ल पाया जाता है, इसके साथ ही साथ साइट्रिक अम्ल भी अल्प मात्रा में पाया जाता है। इन अम्लों का शरीर द्वारा उपयोग किया जाता है और ये शरीर में क्षारीय संचय बनाए रखने में सहायक होते हैं। आम के अन्य घटक इस प्रकार हैं- प्रोटीन ९.६, वसा ०.१, खनिज पदार्थ ०.३ रेशा, १.१ फॉसफोरस ०.०२ और लौह पदार्थ ०.३ प्रतिशत। नमी की मात्रा ८६ प्रतिशत है। आम का औसत ऊर्जा मूल्य प्रति १०० ग्राम में लगभग ५० कैलोरी है। मुंबई की एक किस्म का औसत ऊर्जा मूल्य प्रति १०० ग्राम ९० कैलोरी है। यह विटामिन ‘सी’ के महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक है और इसमें विटामिन ‘ए’ भी प्रचुर मात्रा में है| आम में होमोसिस्टीन ,एंटीओक्सिडेंट ,फाइबर पेक्टिन सैकड़ो ऐसे रासायनिक तत्त्व पाए जाते हैं जो पेट के लिए लाभदायक हैं |



    दशहरी, लंगड़ा , हापूस,चौसा,सफेदा,मलीहाबादी,सिंदुरवा,,तोतोपुरी,कलमी, सभी आमो का स्वाद अलग अलग होता है | कुछ आम काटकर और कुछ रसीले चूस कर खाए जाते हैं |कच्चे आम भी खट्टे और मीठे दोनों प्रकार के होते हैं |आम लक्ष्मीपतियों के भोजन की शोभा तथा गरीबों की उदरपूर्ति का अति उत्तम साधन है। पके फल को तरह तरह से सुरक्षित करके भी रखते हैं। रस का थाली, चकले, कपड़े इत्यादि पर पसार, धूप में सुखा "अमावट" बनाकर रख लेते हैं। यह बड़ी स्वादिष्ट होती है और इसे लोग बड़े प्रेम से खाते हैं। कहीं कहीं फल के रस को अंडे की सफेदी के साथ मिलाकर अतिसार और आँवे के रोग में देते हैं। पेट के कुछ रोगों में छिलका तथा बीज हितकर होता है। कच्चे फल को भूनकर पना बना, नमक, जीरा, हींग, पोदीना इत्यादि मिलाकर पीते हैं, जिससे तरावट आती है और लू लगने का भय कम रहता है। आम के बीज में मैलिक अम्ल अधिक होता है और यह खूनी बवासीर और प्रदर में उपयोगी है। कच्चे आम का अचार, मुरब्बा चटनी अत्यादी लोग बहुत पसंद करते हैं |



    आम के बौर की महक दूर दूर तक फैलकर ऋतुराज वसंत के आने की सूचना दे देती है | आम का बौर भगवान् शिव को अति प्रिय है यह रतिपति कामदेव के पञ्च बाणों में से एक है | आम एक महान औषधि वृछ एवं वर्षा में परम सहायक पूज्य वृछ है | आम के वृछ की घनी छाव में बैठ कर शीतल पवन का आनंद का मज़ा ही कुछ और है | आम के रस का सेवन पूरी या रोटी के साथ बहुत पसंद किया जाता है |आम के फल की मिठास और महक अद्भुत होती है |पानी की फुहारे पड़ते ही आम स्वाद में और भी मीठा हो जात है |आम के पेड़ की दाल से पाक के गिरने वाले आम को कोपद या सीपद कहते हैं जिसका स्वाद पेड़ तो तोड़ने के बाद पकाए आम से अलग होता है| शायद इन्ही खूबियों को देखते हुए इसे फल सम्राट कहा जाता है |
    ----लेखक 




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