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    सोमवार, 29 मई 2017

    जौनपुर डायरी कुछ सुनहरी यादें |


    घुमक्कड़ मिज़ाज इंसान को पता नहीं कहाँ कहाँ ले जाता है | और अगर वो जौनपुर और आस पास के गाँव हों तो पूछना ही क्या | बस ऐसे ही एक बार जौनपुर के गाँव में घुमते हुए मेरे हाथ में कैमरा देख एक बच्चा सामने आ गया बोला मेरी फोटो क्यूँ नहीं खींचते ?

    बच्चा इतनी मासूमियत से बोला की मैंने उसकी तस्वीर खींच ली | फ़ौरन बच्चा बोला दूध पिलावें का चाचा? इसे कहते हैं जौनपुरी   संस्कार |

    मुझे नहीं पता की उस बच्चे का धर्म क्या था और बच्चे को भी इस बात कोई मतलब नहीं था | इसीलिये यह तस्वीर और दिन मुझे याद है जो दिल को अंदर से एक ख़ुशी दे गया| 
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