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    शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

    चित्रसारी के ऐतिहासिक शहंशाह बाबा की मज़ार पे उर्स |



    जौनपुर के  मोहल्ला चितरसारी (खास हौज) स्थित टापू पर विराजमान शहंशाह बाबा का ऐतिहासिक मज़ार है | कल इस मज़ार पे पूरी अकीदत के साथ सालाना उर्स मनाया गया जहां गाजे-बाजे एवं कौव्वाली के साथ बाबा के मजार पर चादरपोशी हुई। इस अवसर पर पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, कैसर रजा, राजकुमार, अच्छे लाल, राम आसरे मौर्य, भानु प्रताप, शीतला प्रसाद, अजय कुमार, केतन सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    माना जाता है की ख़ास हौज में इब्राहिम शाह शर्की ने 1402-1444 में अपने महल के निकट राजियों के स्नान हेतु कृतिम झील का निर्माण कराया था। झील के मध्य में टीले पर शहंशाह बाबा का मजार है। सर्वप्रथम चितरसारी निवासी बांके लाल गुप्त और बुद्धू साव बाबा के उपासक थे। वर्ष 1977 से 1997 तक प्रत्येक वर्ष मजार पर चादरपोशी रस्म किया करते थे जिनके देहांत के बाद उनके भतीजे राजकुमार तब से अब तक चादरपोशी की रस्म अदा करते आ रहे हैं।

    टीले पर शाहम बेग जो अकबर बादशाह का खास सैनिक था, की कब्र उसी टीले पर है। टूटा हुआ कुत्बा आज भी मौजूद है जिस पर 969 हिजरी अंकित है।


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