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    बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

    वेलेंटाइन डे पे प्यार का इज़हार या व्यभिचार |

    वेलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है कौन थे संत वेलेंटाइन ये  आज कोई नहीं सोंचता और वैसे भी इस दिन के बारे में तरह तरह की बातें पहिली हुयी हैं जिनकी सत्यता की जांच भी आज संभव नहीं है | आज का युवा तो बस एक बात जाता है यह दिन है प्रेमी और प्रेमिका के लिए अपने प्यार के इज़हार का | पता नहीं यह कैसा प्यार का इज़हार है की इसी दिन कंडोम को बिक्री बाज़ारों में बढ़ जाया करती है ? कहीं ऐसा तो नहीं प्यार की आड़ में इस दिन अब होने लगा है व्यभिचार ?


    हमारे मित्र राजेश जी अपने लेख में लिखते हैं की "प्यार यदि सचमुच प्यार ही है तो समय बीतने के साथ उसका रंग गहराता ही है, धूमिल नहीं होता। लंबे समय तक साथ रहने के बाद एक-दूसरे को देखा नहीं जाता बल्कि अनुभूत किया जाता है, ह्रदय की अनंत गहराइयों में। जो लोग अपनी सच्ची अंतरंगता के साथ एक-दूसरे के साथ रहते हैं, वे एक-दूसरे में अंशत: समाहित हो जाते हैं। कुछ इस तरह कि 60 वर्ष पहले प्रेम-विवाह करने वाले एक प्रेमी कहते हैं - 'मैं वही सोचता हूं जो 'वह' कहती है या जो मैं सोचता हूं वही 'वह' कहती है। बड़ी मीठी उलझन है।"


    अब ज़रा इस सच्चे प्यार को धयाद से देखें कहीं इसमें ऐसा लगता है की वेलेंटाइन डे केवल शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दिन है या केवल शारीरिक सम्बन्ध बनाने को प्यार कहते हैं| शायद आज का युवा प्यार और वासना का अंतर भूलने लगा है |


    अब जौनपुर भी काफी तरक्की कर गया है शहरों के पार्क और सुनसान जगहों पे प्रेमी जोड़े दिखने लगे हैं | एक दुसरे से सच्चा प्यार करने वालों का एक साथ कहीं भी बैठना और आपस में प्यार का इज़हार करना एक सुंदर कल्पना है लेकिन प्यार की आड़ में व्यभिचार और अनैतिक संबंधों का बनाना अनुचित ही नहीं बल्कि प्यार को बदनाम करना है |


    इसलिए वेलेंटाइन डे अवश्य मनाएं और करें प्यार का इज़हार अपने प्रेमी प्रेमिका से जो पत्नी के सिवाए दूसरा कौन हो सकता है ?

    प्यार को समझने और बांटने का दिन सभी को मुबारक |





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