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    मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

    मॉरीशस जिसे बिहारियों से स्वर्ग बना डाला : एस एम् मासूम

    सच ही  कहा था नरसिंह राव ने जब हम अपनी संस्कृति भूल जायेंगे, तो उसके पार्ट-पुरजे कल मॉरीशस से ही मिलेंगे |
    कभी नरसिंह राव से सुना था की "जब हम अपनी संस्कृति भूल जायेंगे, तो उसके पार्ट-पुरजे कल मॉरीशस से ही मिलेंगे" लेकिन उस समय यह बात मेरी समझ में नहीं आई थी की कैसे यह संभव है की मारीशस देश जहां अंग्रेजी के साथ फ़्रांसीसी भाषा का बोलबाला है और मॉरीशियन क्रेयोल भाषा का इस्तेमाल बोलचाल में अधिक हुआ करता है वो देश भारतीय सस्कृति को संजो के रख सकेगा |


     w.youtube.com/user/payameamn
    दो वर्ष पहले जब मेरी मुलाक़ात भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन मारीशस की चेयर मैन डा सरिता बुधु से जौनपुर में हुयी और उन्होंने मुझे हिंदी भाषा में जौनपुर के इतिहास को विश्व तक पहुंचाने के लिए सम्मानित किया तो मुझे भी उस समय नरसिंह राव के शब्द याद आ गए और मैंने उनके साथ काफी समय बिताया और शहर में घुमते हुए अंत में ज्योति सिन्हा जी के घर में बैठ के इस विषय में विस्तार में चर्चा हुयी जिसमे उनका बिहार के प्रति और भोजपुरी भाषा के प्रति प्रेम झलक रहा था और अपनी भारतीय पहचान खोजने की ख्वाहिश को मैंने उनसे बात चीत में आया | इसी बात चीत के दौरान मुझे एक भोजपुरी गीत याद आ गया "पनिया के जहाज से पलटनिया बन अइहा पिया" और समझ में आया की यह केवल एक गीत ही नहीं बल्कि भोजपुरी इलाके का दर्द है |

     w.youtube.com/user/payameamnइस वर्ष मेरे जौनपुर ना होने के करान डा सरिता बुधु से मुलाक़ात तो नहीं हो सकी लेकिन उनका भोजपुरी प्रेम और उनके दिल का दर्द उनकी बातचीत में झलक रहा था और इसी के साथ साथ उनकी ख़ुशी  अपने पुरखों के गाव उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का दरामपुर जा के आने की झलक रही थी | डा सरिता बुधु के पुरखे कभी इसी गाँव में रहते थे और आज भी डा सरिता बुधु के खानदान के लोग रहते हैं जिनसे मिलने वो आयीं थी |
    डा0 सरिता ने साफ कहा कि मारीशस का भारत से खून का रिश्ता है। मरीशस में बसने वाले जौनपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, आजमगढ़, बलिया, देवरिया, वाराणसी समेत पूर्वाचंल के अन्य जनपदो के लोग ही है। मेरी तरह हजारो लोग अपने पूर्वजो का मूल गांव तलास रहे है। डा0 सरिता ने यह भी बताया कि हम लोग मारीशस में भारत की सभ्यता, संस्कृति ,कला को सजोकर रखी हूं। खासकर भोजपुर भाषा को। आने वाली पीढ़ी के लिए 125 स्कूल खोला गया है। अगले वर्ष मारीशस का 50 वीं वर्ष गांठ है। इस मौके पर करीब 150 स्कूल की स्थापना किया जायेगा। भारत में फिल्म निर्माताओ द्वारा भोजपुर भाषा की गंदी फिल्म बनाकर अश्लीलता फैलाने के सवाल पर वे गम्भीर हो गयी। उन्होने कहा कि ऐसा नही करना चाहिए भोजपुरी भाषा में समाजिक व परिवारिक फिल्म बनाकर समाज को एक अच्छा संदेश देना चाहिए।






    जब मारीशस सन् 1968 में आज़ाद हुआ तो वहाँ रोज़गार के अवसर तलाशने बिहार और आस पास के इलाके से बहुत से लोग गए जिन्होंने शुरू के दौर में गरीबी के दिन वहाँ बीते लेकिन धीरे धीरे तरक्की करते गए और आज उनके पुराने घर का छाजन जो गन्ने के पत्तों का होता  था आज कंक्रीट का हो गया है | वहाँ के लोग आज भी भारत के आने गाँव की बातें यहाँ के लोगों को याद करते अपनी भोजपुरी सभ्यता और संस्कृति को संजोये हुए हैं | भारतीय संस्कृति पूरी तरह आज भी मारीशस में जीवंत है| आज भी यहाँ बड़े बूढों का घरों में दबदबा रहता है और पश्चिमी सभ्यता को घरों में आने से रोका जाता है और यही करान है की आज भी यहाँ संयुक्त परिवार की व्यवस्था कायम है और आपको कहीं भी वृद्धाश्रम देखने को नहीं मिलेंगे |


    आज भी गाँधी की तसवीरें घरों में लगाय बड़े बूढों का पैर छु के आशीर्वाद लेते और घरों में हल्दी, बैंगन, प्याज, लहसुन, चावल, टमाटर, कोहड़ा, लौकी, भिंडी, पपीता, लीची, नींबू की सब्जी खाते और भारतीय त्योहारों को मनाते ६५% से अधिक भारतीय आपको मारीशस में मिल जायेंगे जो अभी भी  पश्चिमी सभ्यता से अछूता है |

    आज भारत में वो पहले वाला बिहार देखने को नहीं मिलता लेकिन मारीशस में आप को वही पुरानी भारतीय संस्कृति देखने को मिल जायगी | सच हो कहा था नरसिंह राव ने जब हम अपनी संस्कृति भूल जायेंगे, तो उसके पार्ट-पुरजे कल मॉरीशस से ही मिलेंगे |

    .. लेखक एस एम् मासूम




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