728x90 AdSpace


  • Latest

    सोमवार, 5 मई 2014

    परिचर्चा का हुआ आयोजन- जनप्रतिनिधि होने के मायने |


    वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग द्वारा शनिवार को संकाय भवन में चुनाव २०१४ के मद्देनजर जनप्रतिनिधि होने के मायने विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया.परिचर्चा में वक्ताओं ने ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव करने की वकालत की जो जनभावनाओं के अनुरुप कार्य करे और संसद में जनता की आवाज रख सके.इसके साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि जनप्रतिनिधि की सहज उपलब्धता हो.


    परिचर्चा में विशेषज्ञ के तौर पर  प्रबन्ध संकाय के अध्यक्ष डॉ मानस पाण्डेय, व्यवसायिक अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ एच सी  पुरोहित ,जनसंचार विभाग के अध्यक्ष  डॉ अजय प्रताप सिंह के साथ ही मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र  ने अपनी बात रखी । परिचर्चा में शामिल  विद्यार्थियों ने  भी विशेषज्ञों  से जमकर सवाल किये ।
    प्रबन्ध संकाय के अध्यक्ष डॉ मानस पाण्डेय ने कहा कि  जनता से जुड़े व्यक्ति को ही जनप्रतिनिधि  के रूप में चुना जाना चाहिए । जनप्रतिनिधियों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता भी निर्धारित होनी चाहिये । बाहय और स्थानीय  प्रत्याशी  के मुद्दे  से ऊपर उठकर विकास करने वाले को  चुनने में प्राथमिकता  रखनी चाहिए ।

    व्यवसायिक अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ एच सी  पुरोहित ने कहा कि जनप्रतिनिधियो  से  जनता  बहुत  सारी उम्मीदें रखती है लेकिन उनके  चयन के समय अपनीं  सोच से हट कर भावनाओं मे बहकर वोट दे देती है जिसका खामियाज़ा उन्हेँ लम्बे समय तक भुगतना पड़ता है । हम ऐसे जनप्रतिनिधि को  चुनें जो हमारी समस्याओं के  निवारण के लिए सदैव प्रयास करे ।

    जनसंचार विभाग के अध्यक्ष  डॉ अजय प्रताप सिंह  ने कहा कि आज सभी दल ऐसे लोगों को टिकट देते हैं जो चुनाव जीत सकें ।यही कारण  है  कि  केंन्द्रीय नेतृत्व  का  चरित्र स्थानीय नेताओं मे देख़ने  क़ो  नही मिलता । आज पूरी दुनिया विकास के रास्ते पर चल रही है ऐसे में  जाति  धर्म  से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधि को चुनने की  आवश्यकता है ।

     जनसंचार  के प्राध्यापक डॉ मनोज मिश्र  ने कहा कि  शिक्षित, दृढ निश्चयी एवँ समाज के  सभी वर्गों को  साथ लेकर चलने वाला व्यक्ति ही सही  मायने में जनप्रतिनिधि हों सकता है ।  जनप्रतिनिधि ऐसा हो जिसे  स्थानीय मुद्दों से लेकर देश विदेश के मुददों की  समझ हो  तभी वह संसद में भी अपनी बात रख पायेगा  । जनप्रतिनिधियों की योग्यता ,जनता से जुड़ाव , सामाजिक  मुद्दों पर समझ एवं  अनिवार्य मतदान पर परिचर्चा में शामिल  विद्यार्थियों ने  विशेषज्ञों  से सवाल किये ।

     परिचर्चा का समन्वयन जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डॉ  दिग्विजय सिंह राठौर  ने किया ,संचालन अभिषेक कटियार एवं आशीष सिंह ने किया।
    डॉ सुनील कुमार ने स्वागत किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विद्यार्थी मौजूद रहे ।  
    • Blogger Comments
    • Facebook Comments

    0 comments:

    एक टिप्पणी भेजें

    हमारा जौनपुर में आपके सुझाव का स्वागत है | सुझाव दे के अपने वतन जौनपुर को विश्वपटल पे उसका सही स्थान दिलाने में हमारी मदद करें |
    संचालक
    एस एम् मासूम

    Item Reviewed: परिचर्चा का हुआ आयोजन- जनप्रतिनिधि होने के मायने | Rating: 5 Reviewed By: S.M.Masoom
    Scroll to Top