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    बुधवार, 10 अक्तूबर 2018

    माता शीतला चैकिया का दर्शन पूर्वांचल के लोंगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।


    जौनपुर के माता शीतला चैकिया का दर्शन पूर्वांचल के लोंगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर किसी को माॅ विन्ध्यवासिनी का दर्शन करना है तो उसके पहले माॅ शीतला का दर्शन जरूरी है उसके बाद ही माॅ विन्ध्यवासिनी के दर्शन का महत्व है। लोगों की आस्था इस बात से भी देखी जा सकती है कि दिल्ली, मुम्बई जैसी जगहों से यहाॅ माॅ के दर्शन को खिंचे चले आते हैं।

    यूॅ तो नवरात्र शुरू होते ही हर जगह माता के दर्शन को श्रद्धालूओं की भीड़  उमड़ पड़ी है लेकिन जौनपुर में नवरात्र के दिन का खास महत्व होता है क्योंकि माता शीतला का दर्शन माॅ विन्ध्यवासिनी से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आज सुबह से ही भक्तों का सैलाब़ माॅ शीतला चैकिया के दर्शन को कतार लगाए खड़ा हो गया। माता की एक झलक पाने के लिए लोग ललायित दिखे। माॅ शीतला के भक्तों की श्रद्धा यहाॅ तक है कि वे अपने बच्चों के मुन्डन संस्कार के लिए मुम्बई तक से खिंचे चले आते हैंै। माता शीतला की महिमा से हर किसी को इतनी श्रद्धा  है कि यहाॅ खड़ा हर श्रद्धालू अपनी-अपनी मनोकामना की पूर्ती के लिए हाथ जोड़ घंटों बैठे प्रार्थना करता रहता है। माता के दर्शन को आने वालों का विश्वास इतना अटल है कि उनको पता है यहाॅ आने का मतलब हर मनाकामना की पूर्ति होना है।


    ऐसी मान्यता है कि अगर आप को माॅ विन्ध्यवासिनी के दर्शन को जाना हो तो उससे पहलेे जौनपुर की माता शीतला चैकिया के दर्शन करने होंगे क्योेंकि माॅ शीतला का एक दूसरा नाम विस्फोटक देवी भी है। माता के दर्शन कर लेने के बाद श्रद्धालुओं की आगे की यात्रा के सफल होने की गारन्टी हो जाती है। इसीलिए वाराणसी, सोनभद्र, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर जैसे पूर्वांचल के जिले से श्रद्धालू जब माॅ विन्ध्यवासिनी के दर्शन को निकलते हैं तो पहले माता शीतला के दर्शन कर के ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।



    नवरात्र के दिनों में तो पूजा-पाठ और व्रत का खास महत्व है ही लेकिन माॅ शीतला के दर्शन के बिना जौनपुर और दूर-दराज के जिलों के श्रद्धालू अपनी भक्ती को पूर्ण नहीं पाते। विशेषतया चेचक के दिनों में मार्च से जून तक प्रत्येक वर्ष जौनपुर और आस पास के लोग हज़ारो की तादात में यहाँ आते है ।

    ये मंदिर जौनपुर से डेढ़ मील की दूरी पे ग्राम चौकीपुर और देवचंद पुर की सीमा पे स्थित है और  मान्यता है की यहां एक कमरे में शीतला जी की मूर्ती रखी है जिसका सम्बन्ध उस समय से है जब जौनपुर आबाद हो रहा था ।

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