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    सोमवार, 13 अक्तूबर 2014

    जानिये हुदहुद तूफ़ान क्या है और जौनपुर में इसका असर कितना रहेगा ?

    हुदहुद चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्तरी अंडमान के पास ९ अक्टूबर से उठा है और अब यह आंध्रप्रदेश और ओडिशा की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहा है| मौसम विभाग के अनुसार हुदहुद के कारण 140-१८० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं|

    इस तूफ़ान का असर १५ अक्टूबर तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी देखा जा रहा है जहां जहां बारिश और तेज़ हवाओं ने मौसम को बदल दिया है | जौनपुर में १३ अक्टूबर को ही इसका असर देखा जाने लगा था और १४ को इसकी तीव्रता में वृधि हो गयी जो १५ अक्टूबर के बाद ख़त्म हो जायेगा |

    हालांकि अधिक तूफान न होने से अधिक जानमाल की छति नहीं हुई। अधिक बरसात होने से कुछ पेड़ धराशायी हुए हैं। बिजली व्यवस्था भी चरमरा गयी है। खंभे और तार टूट गए हैं। कई स्थानों पर बिजली के तारों पर पेड़ गिरने से आपूर्ति में बाधा पहुंची है। रात भर जहां आपूर्ति बाधित रही। वहीं मंगलवार को दिन भर बिजली गायब रही। सोमवार की शाम सात बजे से शुरु हुई बरसात सुबह दस बजे तक चली है। किसानों के अनुसार अगैती आलू को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी डूब जाने से आलू सड़ सकती है। वहीं बाजरा की फसल भी लोट गयी है। हलांकि इसका नुकसान कम फायदा अधिक है। जिले को लंबे समय से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की जा रही थी। लेकिन सूखाग्रस्त नहीं किया गया। धान की फसल सूख रही थी। लेकिन हुदहुद की आमद से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। जहां धान गायब होने को थे वहीं आलू, चना, मटर और सरसों की बुआई प्रभावित हो रही थी। लेकिन खेती के लिए यह बरसात बरदान बतायी जा रही है।
    यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी में उत्तरी अंडमान के पास उठा है लेकिन इमगर इसका नाम "हुदहुद" ओमान में रखा गया है | हुदहुद अरबी भाषा में हूपु नाम की चिड़िया को कहा जाता है और इस चिड़िया का ज़िक्र कुरान के सूरा अल नमल २७:२० हजरत सुलेमान के वाकये में हुआ है |"हुदहुद" दूर देश की खबर लाने वाली चिड़िया के रूप में जानी जाती है |


    इसका नाम "हुदहुद" ओमान ने इसलिए रखा क्यूँ की 1953 से जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है ,मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता आ रहा है| मगर 2004 में तब स्थिति बदल गई, जब डब्लूएमओ की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दी गई और अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया| इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने हिस्सा लिया|

    इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी. हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए| वर्ण क्रम के अनुसार इस बार नाम रखने की बारी ओमान की थी| पिछले साल भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर आए पायलिन चक्रवात का नाम थाईलैंड ने रखा था और अगली बार इस इलाक़े में चक्रवात के नामकरण की बारी पाकिस्तान की होगी जिसे "निलोफर "कहा जायेगा |

    लेखक : एस एम् मासूम
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