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    शनिवार, 27 जनवरी 2018

    त्रिलोचन महादेव मंदिर का रहस्यमयी शिव लिंग |

     https://www.youtube.com/user/payameamnजौनपुर के ठीक बाहरी परिधि पर स्थित इस मंदिर में विराजमान त्रिलोचन महादेव क्षेत्रीय लोगों के आस्था के केंद्र हैं। छोटे से पोखर के सामने सुंदर परिक्षेत्र में निर्मित ये मंदिरमहादेव को समर्पित है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के द्वारा यज्ञ के पश्चात यहांभगवान शिव प्रकट हुये थे। परिसर में मुख्य रूप से शिवलिंग के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओंके मठिये भी है। त्रिलोचन महादेव के प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर की महिमा को लेकर तमाम बातें प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यहां कहीं से शिव लिंग नहीं लाया गया अपितु सात पाताल का भेदन कर यहां बाबा भोलेशंकर स्वयं विराजमान हुए हैं। ये शिव लिंग स्पष्ट रूप से उत्तर दिशा में रेहटी ग्राम की तरफ झुका हुआ है इसीलिए शिव मंदिर को रेहटी गांव में माना जाता है ।त्रिलोचन शिव मंदिर के सामने पूरब दिशा में रहस्यमय ऐतिहासिक कुंड है जिसमें हमेशा जल रहता है। बताते हैं कि इस कुंड में स्नान करने से बुखार और चर्म रोगियों को लाभ मिलता है। इस कुंड का संपर्क जल द्वारा अंदर से सई नदी से है जो वहां से करीब 9 किमी दूर है। 



    जौनपुर मुख्यालय से करीब ३० किलोमीटर दूर इस भब्य  बाबा भोलेनाथ के दरबार में हर सोमवार  भक्तो का जन सैलाब उमड़ता है यहा दूर दूर से भक्त भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आते है इस मंदिर का इतिहास १५ वी सदी तक दिखाई पड़ता है कहा जाता है कि पहले इस स्थान पर घना जगल हुआ करता था लोग इस जगल में जानवरों के चराने जाते थे इसी जानवरों में से एक गाय प्रतिदिन एक स्थान पर खड़ी होकर अपना दुध गिरती थी चरवाहों ने यह बात गाव बताई गाव के बड़े बुजुर्ग उस स्थान पर खुदाई कराई तो विशाल शिवलिग मिला ग्रामीणों ने भोले नाथ को वही स्थापित कर पूजापाठ शुरू कर दिया बाद में यह मंदिर त्रिलोचन महादेव के नाम से विख्यात हुआ एक बार रेहटी और लहगपुर गाव के लोगो के  बीच इस बात को लेकर विवाद शुरू हो गया कि यह मंदिर किस गाव में इस विवाद में कई बार पंचायते हुई लेकिन मामला हल नही हुआ लोगो इस विवाद का हल भोले नाथ पर ही छोड़ दिया मंदिर में ताला बंद कर अपने अपने घर चले गये और दोनों गाव के कुछ लोग पहरेदारी करने लगे सुबह ताला खोला गया तो रेहटी गाव कि तरफ लिग झुका हुआ था सामने स्थित  तालाब के बारे में बताया जा रहा है कि इस कुण्ड सीधे गोमती नदी से जुडी हुई है जिसके चलते इसका  पानी कभी खत्म नही होता इस कुण्ड में स्नान करने से चर्म रोग से छुटकारा मिल जाता है
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