728x90 AdSpace

This Blog is protected by DMCA.com

DMCA.com for Blogger blogs Copyright: All rights reserved. No part of the hamarajaunpur.com may be reproduced or copied in any form or by any means [graphic, electronic or mechanical, including photocopying, recording, taping or information retrieval systems] or reproduced on any disc, tape, perforated media or other information storage device, etc., without the explicit written permission of the editor. Breach of the condition is liable for legal action. hamarajaunpur.com is a part of "Hamara Jaunpur Social welfare Foundation (Regd) Admin S.M.Masoom
  • Latest

    सोमवार, 1 सितंबर 2014

    सैंयां काहे बसे बिदेस ? -डॉ किरण मिश्र



    एक साल में दो बार स्थानांतरण उससे पहले अपनी नौकरी की व्यस्तता के चलते दो वर्ष बाद गाँव  जाने का मौका तलाश कर पाई। हमेशा की तरह  गाँव की सभी वरिष्ठ व कनिष्ठ  महिलाये मुझसे मिलने आई मुझे उनसे मिलना हमेशा अच्छा लगता है। पर इस बार भी मैं उनसे मिलके उदास हूँ क्योंकि उनकी आर्थिक दशा  साल दर साल बद से बदतर होती जा रही है।  


    आम अमरुद और आंवले के बगीचों से घिरा है मेरा छोटा सा गाँव जिला जौनपुर में पड़ता है। मुंगरा बादशाहपुर से जरा आगे बढ़ते ही हमारा गाँव आ जाता है । राष्टीय स्वतंत्रता आंदोलन में पुरे जौनपुर की ही तरह हमारे  गाँव ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था १९४२ के आंदोलन में यहां थाने को फूंक कर साथी कैदियों को छुड़ाने में  हमारे  ताऊजी  भी शामिल थे। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम शिरोमणि दूबे ताउजी के गहरे मित्र थे। स्वतंत्रता सेनानियों के संस्मरण यहाँ बिखरे पड़े है। 


    जौनपुर की धरती राम जी की धरती है। आपस में मिलने पर  जै राम जी की कहा जाता है। राम के जीवनदर्शन को अंतरमन में समाये संयमित जीवन जीते इन लोगो को जब में देखती हूँ तो मन मैं विचार आता है सारे देश को खाना खिलाने वाले ये किसान खुद अपने लिए दो जून के खाने का इंतजाम क्यों नहीं कर पा रहे है। कर्ज से दबे ये किसान मृतक के समान जीवन  क्यों जी  रहे है।  इन किसानो को शहरों की और पलायन ना सिर्फ इन्हे परम्पराओ से दूर करता है बल्कि शहरों की चकाचौंध में फस कर अनेको प्रकार की बुराईयो  और  अनेको लाइलाज बीमारियों से जकड जाता  है। ये समस्या  ना सिर्फ मेरे गाँव  की है बल्कि  पूरे  देश  की  है। सवाल ये उठता है की इसके लिए सरकार की नीतिया क्या होनी चाहिए जवाब बहुत से हो सकते है परन्तु अब नीतियों और जवाब से काम नहीं चलेगा सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। कुछ सुझाव मैं दे रही हूँ 


    १. छोटे किसानो के लिए खेती के समान्तर रोजगार की व्यवस्था होनी चाहिए 
    २. लघुउद्योगो को प्रोहत्सान वा कच्चे माल के लिए बिना ब्याज के रकम 
    ३. गाँव  में कृषि वा कृषि सम्बन्धी उधोगधंधो की स्थापना 

    ये उपाय और भी हो सकते है इनसे कृषि का विकास तो होगा ही परम्परायें  भी जीवित रहेगी और शहरों की तरफ पलायन भी रुकेगा जो शहर के बोझ को कम करेगा कुल मिलाकर सरकार को बहुस्तरीय रोजगार किसानो को उपलब्ध करना ही चाहिए। ऐसा ना हो कि भारत से कृषि का वा कृषक दोनों ही ख़त्म हो इतिहास में समा जाए।  

    ------डॉ किरण मिश्र 



    • Blogger Comments
    • Facebook Comments

    3 comments:

    1. डॉ किरण जी की चिंता जायज है और बहुत सही सुझाव भी है। मैं चूँकि गांव में ही रहता हूँ इस लिए खेती किसानी कर जीने वालों के दर्द से बखूबी परिचित भी हूँ। यह एक अकथ कहानी है। कौन जम्मेदार है क्या कहें। आज की द्वारिका (राजधानी ) भी इन तकलीफों को नहीं देख पा रही जबकि गरीबी हटाओ सबका नारा है। आज किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। आज सत्ता शीर्ष पर या मध्य या अंत तक ऐसा कोई नहीं है जो इनके दर्द को समझ सके। ।
      देखि सुदामा की दीन दशा ,
      करुना करि कै करुना-निधि रोए ।
      पानी परात को हाथ छुयौ नहिं,
      नैनन के जल सों पग धोए ।।

      जवाब देंहटाएं
    2. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

      जवाब देंहटाएं

    हमारा जौनपुर में आपके सुझाव का स्वागत है | सुझाव दे के अपने वतन जौनपुर को विश्वपटल पे उसका सही स्थान दिलाने में हमारी मदद करें |
    संचालक
    एस एम् मासूम

    Item Reviewed: सैंयां काहे बसे बिदेस ? -डॉ किरण मिश्र Rating: 5 Reviewed By: Dr Kiran Mishra
    Scroll to Top