728x90 AdSpace


  • Latest

    शनिवार, 29 सितंबर 2018

    अपने शहर जौनपुर को उसके इतिहास और आस पास से समझिये |

     https://www.youtube.com/payameamn



    जौनपुर को फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने उस समय बसाया जब यह बौद्ध महलों और मठों के खंडहर की शक्ल में उजड़ा पड़ा हुआ था | जौनपुर शहर के बंगाल और दिल्ली के मध्य में होने के कारण फ़िरोज़ शाह ने सं १३६१ इ में इसे बसाया | उस दौर का यह शहर बहुत ही महत्वपूर्ण था क्यों की इसके पश्चिम में प्रतापगढ़ और इलाहाबाद पूर्व में आजमगढ़ और गाज़ीपुर ,उत्तर में सुल्तानपुर और दछिन में बनारस और मिर्ज़ापुर है |  
     https://www.youtube.com/payameamn
    गज सिंह मूर्ती (शार्दुल) 
     https://www.youtube.com/payameamn



     https://www.youtube.com/payameamn


     https://www.youtube.com/payameamnफ़िरोज़शाह तुग़लक़ की मृत्यु के बाद तुग़लक़ वंश का बहुत तेज़ी से पतन शुरू हो गया और वो समय आया की पूरे देश में अराजकता फैलने लगी ऐसे समय में महमूद शाह तुग़लक़ ने  १३९३ ई में ख्वाजा जहां मालिक सर्वर को मालिकुशर्क़ की पदवी दे के विद्रोहियों के दमन के लिए भेजा लेकिन विद्रोहियों के दमन के बाद उसने दिल्ली से अलग एक शर्क़ी राज्य स्थापित कर लिया और जौनपुर को अपनी राजधानी बना लिया | इस प्रकार ख्वाजा जहां शर्क़ी राज्य का बादशाह बन बैठा | 




     https://www.youtube.com/payameamn
    सदर इमामबाड़ा 
    जौनपुर का सुनहरा दौर उस समय आया जब १४०२ में इब्राहिम शाह शर्क़ी राज्य का बादशाह बना क्यों की इब्राहिम शाह एक बड़ा विद्वान और निर्माण का शौक रखने वाला बादशाह था जिसके राज में अमन और शांति उसकी पहचान थी | तैमूर के  आक्रमण के दौरान शांत प्रदेश की तलाश में जौनपुर की तरफ १४०० से अधिक संत और ग्यानी आये जिनका स्वागत इब्राहिम शाह ने किया और उन संतो सूफियों ने जौनपुर को ज्ञान के छत्र में विश्व प्रसिद्द कर दिया और दूर दूर से लोग यहां ज्ञान प्राप्त करने के लिए आने लगे और जौनपुर शीराज़ ऐ हिन्द कहलाने लगा | 

    आज भी आप अगर जौनपुर को आस पास से देखें तो आपको चारों तरफ मक़बरे प्राचीन गुम्बदें और समाधियां नज़र आएंगी जो उन लोगों की हैं जिन्होंने इसे शीराज़ ऐ हिन्द बनवाया लेकिन दुःख की बात यह है की आज अधिकतर खंडहरों में बदल चुका है | 

     https://www.youtube.com/payameamn
    शाही पुल  
    एक शतक से अधिक समय तक शर्क़ी राज्य की राजधानी रहे जौनपुर  में आज भी शिल्प कला के और सुलेख कला के नमूने देखने को मिल जायेंगे | जिसमे शामिल हैं बड़ी मस्जिद , अटाला मस्जिद , लाल दरवाज़ा ,खालिस मुख्लिस मस्जिद, झंझरी मस्जिद, शाही क़िला ,शाही पुल और सैकड़ों समाधियां,क़ब्रें और मक़बरे के साथ साथ बौद्ध समय की पहचान गज सिंह मूर्ती भी मौजूद है  | लेकिन जब आप ध्यान से देखेंगे तो आप पाएंगे की सब कहीं न कहीं से टूट फूट के शिकार हुए हैं जो शर्क़ी राज्य के पतन के बाद आये सिकंदर लोधी  की देंन  है | 

    फिर आया मुगलों का दौर जिसमे शाही पुल , और खानकाहे  और कुछ प्रसिद्ध मंदिर वजूद में आये और इस प्रकार यह जौनपुर केवल विद्या का केंद्र नहीं बल्कि विद्वानों और कलाकारों का ऐसा इलाक़ा बना की आज भी शीराज़ ऐ हिन्द इसकी पहचान बना हुआ है | तुग़लक़ समय और मुगलो में समय के ऐतिहासिक इमामबाड़े भी आप को जौनपुर शहर में जगह जगह मिल जायेंगे जिनपे बनी नक़्क़ासशी  और सुलेख कला ने नमूने आज भी नायाब हैं | 

     https://www.youtube.com/payameamn
    शिवाला 
    फिरोज़  शाह तुग़लक़ के पहले के इतिहास के अधिकतर इतिहास की किताबें मौन हैं लेकिन यहां पे मौजूद बौद्ध धर्म के निशानात और राजा दशरत के समकालीन यमदग्नि ऋषि और परशुराम की जमैथा की कथाएं  बता रही हैं की जौनपुर हिन्दू धर्म में भी एक महत्वपूर्ण  स्थान रखता  है जिसके आस पास  प्रतापगढ़ में पांडवों के आने के निशाँन अजगरा में मिलते हैं और इसी के साथ साथ अयोध्या काशी ,बनारस ,मिर्ज़ापुर जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर सटे हुए है | 

     https://www.youtube.com/payameamn
    ज़ुलक़दर मंज़िल 
    जौनपुर में जहां रामचंद्र जी का आगमन कई बार  हुआ और यहीं पे सीता ने अपना वनवास ख़त्म करते हुए चूड़ियाँ पहनी | जमैथा परशुराम जी की जन्मस्थली के रूप में मौजूद है तो उधर महल में दुर्वासा ऋषि का आश्रम और शाहगंज पे आज भी लगता चूड़ी मेला जहां सीताजी ने वनवास में पहने योगियों के रूप को बदलते हुए चूड़ियां पहनी थी आज भी इसके धार्मिक महत्व को पबैता रहा है |  यह वो इलाक़ा है जहां ऋषि मुनियों,बादशाहों  सूफियों सबको शांति मिला करती थी और गोमती किनारे आज भी आपको पुराने मंदिर ,मस्जिद, मज़ारें देखने को मिल जाएंगी और जौनपुर के स्वर्णिम इतिहास को आज भी बयान कर रहे हैं और उनके टूटे अवशेष एक आवाज़ दे रहे हैं की आओ मुझे फिर से एक जीवन दो मैं तुम्हे ज्ञान अमन और शांति से भरा शहर दूँगा | 




    जौनपुर शर्क़ी राज्य के बाद अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को बचाने में ना कामयाब  रहा  है और आज आवश्यकता है इसे पुनर्जीवित करते हुए पर्यटकों के आने योग्य बनाने की जिस से जौनपुर  फिर से विश्वपटल में सितारों क तरह चमक सके | लेकिन जौनपुर अपने "ज्ञान के स्त्रोत" और शीराज़ ऐ हिन्द जैसी पहचान को  आज भी सशक्त तरीके से आगे बढ़ाने में कामयाब है | 







     Chat With us on whatsapp
     Admin and Founder 
    S.M.Masoom
    Cont:9452060283
    • Blogger Comments
    • Facebook Comments

    0 comments:

    एक टिप्पणी भेजें

    हमारा जौनपुर में आपके सुझाव का स्वागत है | सुझाव दे के अपने वतन जौनपुर को विश्वपटल पे उसका सही स्थान दिलाने में हमारी मदद करें |
    संचालक
    एस एम् मासूम

    Item Reviewed: अपने शहर जौनपुर को उसके इतिहास और आस पास से समझिये | Rating: 5 Reviewed By: एस एम् मासूम
    Scroll to Top