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    सोमवार, 28 सितंबर 2020

    जानिए जौनपुर की उस इमरती का इतिहास जिसकी खुशबु से न बच सके मंत्री और मुख्यमंत्री |


    ऐसा लगता है की जौनपुर के इत्र और इमरती की खुशबु अब पूरी दुनिया महसूस करेगी  क्यों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दम तोड़ रहे जौनपुर के इत्र उद्योग व इमरती को ब्रांडिंग करने क आश्वासन देते हुए  जौनपुरवासियों को उम्मीदों से भर दिया है। 

    नगर के प्रख्यात बेनीराम देवी प्रसाद के दुकान की बनी इमरती की लज्जत आज 170 वर्ष बाद भी उसी तरह से बरकरार है। इसके जायके के मुरीद पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 चंद्रशेखर समेत कई दिग्गज नेता और बड़े अफसर है। इसकी सुगंध जौनपुर ही नही बल्कि  देश के कोने कोने तक फैली है। यहां लोग जब अपने नाते रिश्तेदार के घर  शिराज ए हिन्द की सरजमी जौनपुर की धरती पर उगने वाली मूली मक्का पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है वही यहां के बेनीराम देवीप्रसाद की दुकान की बनी इमरती लोगो को अपना गुलाम बना रखी है। यह इमरती पिछले 170 वर्षो से लगातार अपने लज्जत की बदौलत जिले का नाम पूरे देश में रौशन किया है।

    मूल रुप से जौनपुर  कलीचाबाद निवासी बेनीराम फैज़ाबाद में पोस्टमास्टर के रूप में कार्यरत थे। एक बार अपने अंग्रेज अधिकारी को उन्होंने फैज़ाबाद में  इमरती बनाकर परोसा तो खूब तारीफ मिली। उस अँगरेज़ ने बेनीराम से कहा की अपने वतन जौनपुर जाइये और मैं अप्किएक दूकान शाहीपुल के पास खुलवा देता हूँ | इसके बाद उन्होंने दुकान खोलने की ठान ली। शाही पुल के पास बेनीराम देवी प्रसाद दो सगे भाईयो ने दुकान खोल ली। तब गोमती नदी के रास्ते ही व्यापार होता था। लिहाजा यहां आने-जाने वाले लोगों की भीड़ रहती थी। एक मड़हे में खुली दुकान धीरे-धीरे विस्तार लेती गई। 1855 में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ।   

    इस इमरती की खासियत है कि उड़द की दाल ,देशी चीनी और शुध्द देशी से लकड़ी की आंच पर बनायी जाती है। इस आधुनिक युग में भी आज उड़द की दाल को सिल बट्टे पर पीसकर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके कारण आज भी उसकी लज्जत बरकरार है।

          

    उस गुलामी के दौर मैं भी  बेनीराम देवीप्रसाद कि  इमरती सर्वश्रेष्ट मानी  जाती थी. उसके बाद बेनी राम देवी प्रसाद के  उनके लड़के बैजनाथ प्रसाद, सीताराम व पुरषोत्तम दास ने  जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की महक  बनाए रखी और अब जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को बेनीराम देवी प्रसाद की पांचवीं  पीढ़ी के वंशजों  ने पूरी तरह से संभाल लिया है और इसे विदेश भी भेजा जाने लगा है.  जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती आज तकरीबन 160  वर्ष पुरानी हो चुकी है और उसका स्वाद और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है|

    देशी चीनी और देशी घी में बनने के कारण इमरती चाहे गर्म या ठण्डी दोनो परिस्थितियों मुलायम एवं स्वादिष्ट होती है। सबसे बड़ी खासियत है कि इसे बिना फ्रीज में रखे दस दिन तक यह खराब नही होती है।  इसी लिए इस इमरती के मुरीद जौनपुर में हो या विदेशो में सभी इसका स्वाद चखने को बेकरार रहते है।

     इमरती के लिए देशी चीनी आज भी बलिया से मंगाई जाती है। देशी चीनी और देशी घी में बनने के कारण इमरती गरम होने और ठंडी रहने पर भी मुलायम रहती है। बिना फ्रिज के इस इमरती को कम से कम दस दिन तक सही हालत में रखा जा सकता है।
       

    कभी आप जौनपुर आयें तो ओलन्दगंज से ताज़ी इमारती का स्वाद चखना ना भूले |

    .....एस एम मासूम

     

    जौनपुर के पास पर्यटकों  को देने के लिये बहुत कुछ है। विश्व पर्यटन दिवस पर इस एम् मासूम की विशेष पेशकश



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    एस एम् मासूम

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