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    सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

    भोजपुरी आज धीरे-धीरे देश की भाषा बनती जा रही है


    भोजपुरी आज धीरे-धीरे जहां देश की भाषा बनती जा रही है, वहीं इसकी पहचान में वृद्धि भी हुई है। आज विश्व के मानस पटस पर इसकी उभरती पहचान दिखायी पड़ रही है। सच तो यह है कि भोजपुरी में जो मिठास है, वह और कहीं नहीं। उक्त बातें भोजपुरी स्पीकिंग मारीशस की चेयरमैन डा. सरिता बुधु ने इंदिरा ज्योति क्लब शाहगंज में आयोजित अपने सम्मान समारोह में कही। इसी क्रम में मुख्य अतिथि आरक्षी अधीक्षक हैप्पी गुप्तन ने कहा कि भाषा हमारे पहचान का द्योतक है, इसलिये भाषा को आगे ले जाने का प्रयास होना चाहिये।
    इसके पहले डा. बुधु व मुख्य अतिथि हैप्पी गुप्तन ने दीप प्रज्ज्वलित करके मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात् सुरेश सोनी, विनोद आर्य, दिनेश गुप्त, सुनील गुप्त, अशोक गुप्त, उमानाथ जायसवाल, सरिता साहू, शशिकला, किरन जायसवाल, मीनू आर्य, मंजू गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। साथ ही अशोक गुप्त, अजीत आर्य, प्रेम नारायण व हनुमान प्रसाद गुप्त ने बुकें भेंट किया। इसी क्रम में जहां संस्थापक मनोज गुप्त ने संस्था का परिचय कराया, वहीं विशिष्ट अतिथि डा. कुबेर मिश्र, डा. ज्योति दास, डा. ब्रजेश यदुवंशी, फादर एंटोनी रोड्रिक्स, डा. रहबर सहित अन्य वक्ताओं ने अपना विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक कुन्दन लाल शर्मा ने मुख्य अतिथि हैप्पी गुप्तन को स्मृति चिन्ह एवं किरन जायसवाल ने अंगवस्त्रम् भेंट किया। सेंट थाॅमस के प्रधानाचार्य फादर एंटोनी रोड्रिक्स ने स्मृति चिन्ह ने प्रदान किया। इसी क्रम में डा. सरिता ने फादर रोड्रिक्स, डा. यदुवंशी, डा. कुबेर मिश्र, डा. रहबर, डा. ज्योति दास को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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    एस एम् मासूम

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