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    बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

    जौनपुर की मूली पहुंची लखनऊ राजभवन में |



    लखनऊ राज भवन में मुख्य मंत्री उत्तेर प्रदेश श्री अखिलेश यादव , श्री पारसनाथ यादव, जेल मंत्री श्री राजेंद्र चौधरी जौनपुर की मूली के बारे में जानकारी लेने के बाद उसे उठा के दिखाते हुए | इन मंत्रीगण की ख़ुशी से आप समझ सकते हैं की जौनपुर की मूली की अहमियत क्या है |


    दुःख की बात यह है की मूली की नेवार प्रजाति जो कभी जौनपुर कि शान रही थी आज तलाशने पे बड़ी मुश्किल से मिल जाया करती है | शहरीकरण जौनपुर की पहचान रही इस प्रजाति को निगल गया | यह मूली अपने बड़े अकार और मीठे स्वाद के लिए मशहूर थी| आप को जान के आश्चर्य होगा कि यहाँ की मूली छह से सात फीट लंबी व ढाई फीट मोटी होती है |  इस मूली को जौनपुर की सीमा से लगे आधा दर्जन गांवों में उगाया जाता था जहां  करीब से गोमती नदी बहती है| अपनी भौगोलिक परिस्थिति और खास किस्म की मिट्टी के चलते नेवार प्जाति की मूली जौनपुर में ही होती है| ख़ास कर के यह मूली उस खेत में अधिक पैदा होती है जिसमे इसके पहले तम्बाकू बोया गया हो |

    किसी जमाने में पूरी दुनियां में सब पर भारी रही  जौनपुर की मूली जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या के चलते आज अपने वजूद के लिए के लिए लड़ रही  हैं। हालत यह है कि कभी सैकड़ो बीघे की जमीनों पर होने वाली यह खेती जमीन के चंद टुकड़ो तक ही सीमित रह गयी हैं।  नगर के खासनपुर मोहल्ले के खेतो में पैदा हुई इन मूलियों का कद करीब तीन दषक पूर्व इसका चार गुना हुआ करती थी। लेकिन बदलते जलवायु और तेजी से बढ़ रही जनसंख्या के चलते आज यह पोलियोग्रस्त हो गया हैं। पहले इन मूलियों की खेती गोमती नदी के किनारे बसे बलुआघाट,ताड़तला,पानदरीबा, मुफ्ती मोहला,मुल्ला टोला समेत दर्जनो गांवो के किसान करते थे। अब उन  मूलियों के खेतो में कंकरीट के जंगल बिछ गये हैं। फिलहाल कुछ जागरूक किसान अपने पूर्वजो की खेती और जौनपुर की पहचान को संरक्षित करने के लिए आज भी इन नेवार प्रजाति की मूली की खेती अभी भी कर रहे हैं।

    मूली की इस नेवार प्रजाति को बचाने की हर हाल में कोशिश की जानी चाहिए .|

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