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    सोमवार, 17 मार्च 2014

    अंतरजाल पे भी खेली जौंपुरियों ने गंगा जमुनी होली |

    माधव पट्टी से विद्रोही गौरव सोलंकी के घर  होली 

    गंगा जमुनी तहजीब के लिए प्रसिद्ध जौनपुर में हर त्यौहार, चाहे वो दिवाली हो ईद या होली मिल जुल के मनायाशिराज़ ऐ हिन्द की सरज़मी पर जौनपुर शहर में आज एक फिर गंगा जमुनी तहजीब की इबादत लिखी गई हिन्दू के साथ मुसलमानो ने जमकर होली खेली और एक दूसरे को बधाइयाँ दी।पूरे जौनपुर में होली के रंग में रंगा नजर आया। सड़कों से लेकर गलियों में बच्चे पिचकारी से अपने साथियों व बड़ों को सराबोर करते दिखे। शहर में राह चलते लोगों पर रंग डालने में होली के हुरियारे दिखे। किसी के हाथ में कलर स्प्रे तो किसी के हाथ में रंग से भरे गुब्बारे। बच्चों ने आते जाते बाइक सवारों गुब्बारे फेंक रहे हैं।

    सोशल साइट्स फेसबुक, ट्विटर, पे तो इस बार जौंपुरियों ने कमाल कर दिया व्यंग्य की पिचकारियों और एक से एक आकर्षक होली के ग्रीटिंग्स के साथ अंतरजाल पे होली मनाई गयी जिसमे क्या हिन्दू क्या मुसलमान सभी मिल के होली खेलते दिखाई दिए | विधानसभा इलेक्शन २१०४ का दौर है  लोगों ने इन्ही ग्रीटिंग्स द्वारा जनता का मन मोहने का भी प्रयास किया | जौनपुर के पत्रकारों के बारे में उनके होली ग्रीटिंग से पहली बार जाने को मिला की वो किन किन चैनल या अखबार से जुड़े हुए हैं |

    आज की युवा पीढ़ी अब ऐसा लगता है रंगों और गुलाल से परहेज़ करने लगी है क्यूँ की जिस समय लोग बहार होली खेल रहे थे उसे समय हज़ारों युवा  सोशल साइट्स फेसबुक, ट्विटर, पे शब्दों और कमेन्ट की पिचकारियों के साथ होली का मज़ा ले रहे थे | वृद्ध और महिलाओं के लिए तो  ये सोशल साइट्स होली के अवसर के अवसर पे वरदान से कम नहीं | कोई पत्नी को रंग लगा के दिखा रहा था तो कोई गुजिया खिला रहा था , कोई महिला कविता सुना रही थी तो कोई मालपुए कैसे बने बता रही थी |

    लेकिन फिर भी जौनपुर की सड़कों पे रंग  और गुलाल उड़ता रहा लोग मज़े लेते रहे और खुशियाँ मनाते रहे | हमारे मित्र डॉ अरविन्द मिश्रा जी की  पैनी नज़र होली के दिन तलाश रही थी होली के बेहतरीन गीत और हम जैसे उठा रहे थे उन गीतों को सुनने का मज़ा जो वास्तव में होली के दिन सड़कों पे बजने वाले फूहड़ गीतों को सुनने में तो कभी नहीं आता | आप भी उठाये इन गीतों को सुनने का मज़ा |


    होली का एक आनंद बनारसी चैता सुनाने का है|
    सेजिया से सैयां रूठ गईले हो रामा
    कोयल तोरी बोलिया
    रोज तू बोलेली सांझ सवेरवां
    आज तू बोली आधी रतिया
    होत भोर तोरा खोतवा उजड़बै
    और कटइबो बन बगिया हो रामा
    कोयल तोरी बोलिया



    पंडित छन्नूलाल मिश्र की आवाज में
    रंग डारुँगी रंग डारुँगी रंग डारुँगी
    नन्द के लालन पे
    सांवर रंग लाल कर दूंगी
    मालि गुलाल दोनों गालन पे
    नारी बनाई के नाच नचाउंगी
    मृदंग के तालन पे ...
    डरो न मीत पकड़ लाओ उनको
    बिंदी लगाऊं इन भालन पे
    रंग डारूंगी



    आज के दिन यदि डॉ पवन विजय जी का गीत जो उन्होंने मुझे अमन का पैगाम पे भेजा था ना पढ़ा जाए तो उस गीत के साथ ना इंसाफी होगी क्यूँ की यह गीत डॉ पवन विजय जी के जौनपुरी गंगा जमुनी तहजीब की ही देन है |
    नए साल पर पूरी कर मेरे मन की मुराद मौला
    मिरे वतन के सीने पर ना हो कोई फसाद मौला
    बच्चों का आँगन ना छूटे, बूढ़े नींद चैन की सोवें
    बहने चहके चिडियों सी माओं की गोद आबाद मौला 
    रोटी कपडा मकान हर इक  शख्स को हासिल हो
    प्यार की फ़स्ल उगाये ज़मी रहे दिल शाद मौला
    अली खेले होली, सिवई खिलाये घनश्याम ईद की
    गंगा जमुना का पानी अब और नाहो बरबाद मौला
    …….पवन कुमार मिश्र

    जौनपुर की होली |

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