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    मंगलवार, 25 मार्च 2014

    रंग दे गुलाबी चूड़ियाँ रे |

    होली खेले कई दिन बीत गए लेकिन जौंपुरियों पे अभी तक होली का खुमार बाक़ी है और होली मिलन डा दौर अभी थमा नहीं है | यह खुमार शायद मुझे पे भी आज तक चढ़ा है तभी तो होली गीत गुनगुनाने का दिल अभी तक कर रहा है |

    गंगा जमुनी तहजीब का शहर जौनपुर इस होली को बहुत से अलग अलग तरीके से याद किया करता है क्यूंकि यहाँ बादशाह हो या फ़कीर ,हिन्दू हो या मुसलमान सभी इस त्यौहार पे प्रेम के रंग में रंग जाते हैं |  होली गीत ,शायर और कवी इस होली के त्यौहार को कैसे गाते और लिखते हैं आज दिल ने चाहा की इसे भी महसूस किया जाए |

    ठुमरी क्वीन शोभा गुर्टू  के इस गीत "रंग दे गुलाबी चूड़ियाँ रे |" का मज़ा सबसे पहले लेते हैं |



    अब सुनिए आबिदा परवीन को " होरी हो रही है "


    उस्ताद जाकिर हुसैन के साथ राजस्थानी होली का लें मज़ा |



    अमीर खुसरो को कौन भूल सकता है "आज रंग है " सुनिए इस शब्दों को कैसे पेश किया है साबरी भाइयों ने |





    नजीर अकबराबादी "जब फागुन रंग "

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    एस एम् मासूम

    Item Reviewed: रंग दे गुलाबी चूड़ियाँ रे | Rating: 5 Reviewed By: S.M.Masoom
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