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    मंगलवार, 11 जून 2019

    जौनपुर शाही क़िले के बाहरी गेट के खम्बे पे क्या सच मे आयतल कुर्सी लिखी है |

    जौनपुर के इतिहास से छेड़ छाड़ सोशल मीडिया में बिना इतिहास की जानकारी के धन कमाने के लिए वीडियो बनाने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा | ऐसे में लोगों को सत्य क्या है यह बताने की कोशिश कर  रहा हूँ और हर सप्ताह एक सत्य सामने लाया जायगा | 

    इस बार बहुचर्चित क़िले के गेट पे बने एक खम्बे के रहस्य से पर्दा हटा रहा हूँ जिसमे बारे में लोग होने अपने वीडियो में दावा करते हैं की यह खम्बे में आयतलकुर्सी (क़ुरान की आयात ) लिखी है जो पूरी तरह से झूट है | 

    आयतल कुर्सी क़ुरान की आयात है और क़ुरान की भाषा अरबी है जबकि उस खम्बे पे जो इबारत लिखी है वो फारसी है |  दूसरी बात जो फैलाई जाती है वो यह की इसमें ख़ज़ाने का रहस्य छुपता है जो की अज्ञानता वश मशहूर किया गया है | 

    हकीकत क्या है जानिए | 

    जब मैं खम्बे पे पहुंचा  और जब ध्यान से देखा तो उनमे फ़ारसी लिखी हुयी थी जिसे समझने के लिए फारसी जानकार ज़रूरी था तो मैंने मौलाना सफदर ज़ैदी साहब की मदद  ली और जो रहस्य सामेने  आया वो इस प्रकार है | 

    इस 6 फीट के खम्बे पे 17 लाइन की इबारत लिखी हुयी है | ये  शिला लेख गोलाकार चबुतरे पे लगा हुआ है और उस पे फारसी मे कुछ लिखा हुआ  है | इस शिला लेख की लिखावट सन ११८० हिजरी की है | इसको सैयेद मुहम्मद बशीर खां क़िलेदार ने शाह आलम जलालुद्दीन बादशाह तथा नवाब वज़ीर के समय मे लगवाया था |

     https://www.youtube.com/user/payameamn
    इसके शब्द इस प्रकार हैं | 

    सय्यद मुहम्मद बशीर खान ने यहा के शासक और कोतवाल ,फौजदार और निवासियो को चेतावनी दी कि जौनपुर की आय मे सैयदो  व बेवाओं  तथा उनसे संबंधित और दीन की सहायता हेतू जो धन निश्चित है उसमे कोई कमी ना की जाय | हिन्दुओ को राम गंगा और त्रिवेणी और मुसलमानो को खुदा व रसूल (स.अ व ) व पंजतन पाख ,सहाबा और चाहारदा मासूम और सुन्नी हजरात को चार यार की क़सम है कि यदि उन्होंने इसका पालन नहीं किया तो खुदा और रसूल की उसपे  धिक्कार होगी और प्रलय के दिन मुख पे कालिमा  लगी होगी तथा नर्क निवासियो की पंक्ती मे शामिल होगा | बारह रबिउल अव्वल  ११८० हिजरी को इस शुभ कार्य का पत्थर  सैयेद मुहम्मद बशीर खां क़िलेदार ने लगवाया  |

    English  Translation 
     https://youtube.com/payameamn


    सत्य ये है इस खम्बे पे फ़ारसी में एक क़सम लिखी है जिसे  मुहम्मद बशीर खां क़िलेदार ने शाह आलम जलालुद्दीन बादशाह तथा नवाब वज़ीर के समय मे लगवाया था | यह समय था ११८० हिजरी --१७६७ ईस्वी | 

    लेखक एस एम मासूम 
    copyright 
    "बोलते पथ्थरों के शहर जौनपुर का इतिहास  " लेखक एस एम मासूम 
     https://www.youtube.com/user/payameamn

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