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    रविवार, 29 अप्रैल 2012

    भारत के भीतर के लेखक जनाब वेकार खान से एक बात चीत



    आज देश मैं हर तरफ भ्रष्टाचार को मुद्दा बना के बातें हो रही हैं. ऐसे माहौल मैं जहाँ भ्रष्टाचार रिवाज बनता जा रहा है वहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ना आसान काम नहीं |

    जौनपुर के सराएख्वाजा  दाख्खिन पट्टी (मकर ख्वान) निवासी श्री वेकार हुसैन खान का नाम भ्रष्टाचार, उत्पीडन और अन्याय के खिलाफ लड़ने वालों मैं लिया जाता है |

    २७ नवम्बर २००७ और २५ जनवरी २०१० को हिंदुस्तान समाचार पत्र ने इनके बारे मैं विस्तार से लेख़ छापा था और इनको गणतंत्र के रखवाले के रूप मैं पेश किया था. वेकार साहब से टेलीफ़ोन से बात चीत पे इन्होने बताया की मुंबई से शिक्षा के समय जनाब वेकार साहब जुनिएर रेड क्रोस सोसाइटी के सेक्रेटरी नुयुक्त हुए. पेशे से शिक्षक वेकार साहब हिंदुस्तान मानव अधिकार अस्सोसिअशन के प्रदेश सचिव के रूप मैं काम कर रहे हैं |

    श्री वेकार साहब का कहना है की देश में भ्रष्टाचार समंदर मैं नामक के पानी की तरह घुल चुका है. इसी मुद्दे को ले कर उनकी किताब" भारत के भीतर " दो भागों मैं प्रकाशित हो चुकी है |

    इस बार जौनपुर जब आया तो जनाब वेकार साहब से मुलाक़ात हो गयी. पेश है जनाब वेकार खान साहब से बात चीत के कुछ अंश.


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    Item Reviewed: भारत के भीतर के लेखक जनाब वेकार खान से एक बात चीत Rating: 5 Reviewed By: S.M.Masoom
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