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    शनिवार, 7 मार्च 2020

    हर होली में दिल इंतज़ार करता है काश वो बचपन की होली के दिन फिर से वापस आ जाए || एस एम् मासूम

    हर होली में दिल इंतज़ार करता है काश वो बचपन की होली के दिन फिर से वापस आ जाए|

    समस्त पाठको को होली की बधाई और शुभकामनाएं | एस एम् मासूम।

    याद आती है वो गुजरे जमाने की होली |
    निकलती थी जब हम लथपथो की टोली||

     होली मुबारक
    हर होली में दिल इंतज़ार करता है काश वो बचपन की होली के दिन फिर से वापस आ जाए|
    हमने कभी खेली थी होली जिसका दिल इंतज़ार आज भी करता है | जी हाँ आज से 45 वर्ष पहले की बात है जब हम सब होली का इंतज़ार करते थे और पिचकारियां गुब्बारे जमा किया करते थे | और होली के दिन तो बस पूछिए मत सुबह होते ही इंतज़ार करते थे की आस पड़ोस के बच्चे आएं की होली की टोली बना के शुरू हो जाएँ मुहब्बत के रंग भरना | जिन अंकल आंटी से साल भर डरते थे होली के दिन उनको भी नहीं बक्शते थे रंग लगा के ही मानते थे | पानी ही हौज़ में रंगों को भर के आते जाते बच्चों को पकड़ पकड़ के उसमे डालना आज भी नहीं भूलता |
    और बचपन से जवानी आ गयी लखनऊ से बनारस आ गए लेकिन होली खेलना नहीं बंद हुआ | बनारस की होली और वो भी जवानी की होली का मज़ा ज़रा बचपन की होली से हट के हुआ करता था | अब तो दोस्तों से छुप के कुछ घरों में रंग लगाने की फ़िराक में रहा करते थे जवानी आते आते होली का अंदाज़ बदलने लगा था अब इसमें रंगों की जगह पेंट तारकोल इत्यादि का इस्तेमाल भी होने लगा था जो मुझे नहीं भाता था और होली खेलने के इलाक़े सिमट के रह गए थे लेकिन अब भी शाम में होली मिलन का अपना मज़ा आता था | सफ़ेद कुरता पाजामा पहन के अबीर गुलाल लगाय और हाथों में लिए लोगों के घर मिलने जाना पापड़ गुजिये खाना और गले मिल मिल के मुहब्बतों के रंग लगाना मुझसे अब अधिक बहाने लगा था | और फिर शाम का हल्का सा अँधेरा होते ही दशाश्वमेघ घाट पे जा के नाव की सैर और शायरी पढ़ना सुनना और वो भी ठंडाई के मज़े के साथ भी कुछ दिन चला | और फिर मुंबई की तरफ चल पड़ा जोव्यावसायिक समाज था जहां होली तो होती थी लेकिन वो होली नहीं जिसका मज़ा मैं लखनऊ बनारस में ले चूका था | वर्षों बीत गए और अब तो अपने लखनऊ बनारस जौनपुर में भी होली का वो जोश नहीं दिखाई देता और वो मज़ा नहीं रहा फिर भी हर होली में दिल इंतज़ार करता है काश वो बचपन की होली के दिन फिर से वापस आ जाए फिर एक बार फिर से वही रंगों की पिचकारियां होती वही जोश और मुहब्बत होती जिस का नशा महीनो नहीं उतरता था |
    समस्त पाठको को होली की बधाई और शुभकामनाएं | एस एम् मासूम
    Happy Holi #Happyholi #Holi


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