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    मंगलवार, 13 जून 2017

    दोहरा मुक्त जौनपुर अभियान में आई तेज़ी |


     https://www.facebook.com/hamarajaunpur/
    जौनपुर। जौनपुर को दोहरा मुक्त बनाने का बिगुल बजाने वाले युवा समाजसेवी विकास तिवारी के नेतृत्व में सोमवार को हवन-यज्ञ कार्यक्रम किया गया जहां दोहरा मुक्त जौनपुर के लिये बुद्धि-शुद्धि यज्ञ के साथ गोमती नदी में दोहरे को विसर्जित किया गया। इसके पहले युवाओं की एक टोली समाजसेवी श्री तिवारी के नेतृत्व में केराकत नगर में स्थित गोमतेश्वर महादेव मन्दिर में एकत्रित हुई। इस दौरान जौनपुर को दोहरा मुक्त बनाने के उद्देश्य से समाज में जागरूकता लाने, शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षित कराने, जिले के सभी जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कराने, दोहरा खाने/बेचने वालों की सद्बुद्धि के साथ हवन-यज्ञ किया गया। इस मौके पर श्री तिवारी ने दोहरा क्या है, दोहरे से हानि, दोहरे से सम्बन्धित नामचीन चिकित्सकों के विचार, दोहरे से हुई मौतों, दोहरे पर प्रतिबंध लगाने के लिये की गयी सामाजिक पहल, शासन-प्रशासन द्वारा कृत कार्यवाही पर चर्चा किया। अन्त में जौनपुर में बिकने वाले दाहरे को गोमती नदी में विसर्जित कर ईश्वर से प्रार्थना की गयी कि जौनपुर को दोहरा मुक्त बनाइये। साथ ही दोहरा खाने से जिन लोगों की मौत हुई है, उनकी आत्मा की शान्ति के लिये प्रार्थना की गयी। 
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    क्या है दोहरा- साभार शिराज़ ऐ हिन्द 

    उ0प्र0 के जौनपुर जिले में नषा के लिए एक विशेष प्रकार का खाद्य-मादक पदार्थ बिकता है जो देष के किसी अन्य हिस्से में नहीं पाया जाता है जिसका नाम है ‘‘दोहरा’’ जिसका जौनपुर जिले से बड़े पैमाने पर निर्यात भी किया जाता है, जौनपुर जिले में दोहरा बेचने वालों की अनगिनत दुकाने हैं यहाॅ तक कि मिठाई बेचने वाली दुकान व जनरल स्टोर्स पर भी धड़ल्ले से दोहरा बेचने का कारोबार किया जाता है दोहरा एक विषेश प्रकार का खाद्य मादक पदार्थ है, जौनपुर में दोहरा का निर्माण करने वाले कोई भी दुकानदार दोहरा बनाने कि सही जानकारी नहीं देता है, वजह सभी अपने-अपने विषेश तरीके से दोहरा बनाते है, पड़ताल करने पर पता चलता है कि सुपाड़ी को एक पात्र में तीन से चार दिनों तक भीगोकर रखा जाता है, इसके बाद चुने के पानी में इसे सोधा जाता है इसके बाद इसकी फर्री काटी जाती है, पहाड़ी कत्था ब्रास, पिपरमिंट, चूना, जर्दा के अलावा कुछ केमिकल से तैयार किया जाता है, आम चर्चा है कि कत्था की जगह दोहरा निर्माता ‘‘गैबियर’’ का प्रयोग कर रहे हैं जबकि इसका प्रयोग मोटे तौर पर टेनरियों में चमड़े की सफाई वगैरह में होता है इसका लाइसेंस भी इसलिए टेनरी संचालकों को मिलता है। पर इसकी बिना परवाह किये लोग इसे चाव से खाते और खिलाते हैं यह मीठा जहर आज हमारी युवा पिढी को अन्दर से खोखला कर रहा है।


     

    ‘‘दोहरा’’ के हानिकारक होने के कुछ कारण -

    मुख्य खाद्य निरीक्षक जौनपुर जे0पी0 मौर्या की एक रिपोर्ट के अनुसार -
    1- दोहरे में अक्सर भीगी सुपारी का प्रयोग होता है, जिसमें फंगस लगने की प्रबल सम्भावना होती है।
    2- दोहरा निर्मााण इकाइयों के निरीक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि जिस पात्र में सुपाड़ी मसाले भिगोकर सड़ाये जाते हैं, उसकी स्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है, जो सीधे जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
    3- दोहरा में यह सम्भावना रहती है कि इसमें किसी मादक पदार्थ का भी प्रयोग किया जाता है, जो कि जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
    4- पी0एफ0ए0 एक्ट के अन्तर्गत दोहरा का कोई मानक निर्धारित नहीं है जिसकी वजह से निर्माता कोई भी अखाद्य पदार्थ मिला सकता है।
    5- पी0एफ0ए0 एक्ट 1954 नियमावली 1955 के अन्तर्गत खाद्य पदार्थों की पैकिंग, बनाने की विधि, बेस्ट-बिफोर अवयन अंकित होना अनिवार्य है जब कि दोहरे में उपरोक्त में से कोई खाद्य पदार्थ घोशणा पैकेट पर अंकित नहीं होता है, इससे यह पता नहीं चलता है कि इसका निर्माण कब हुआ है तथा इसका प्रयोग कब तक किया जा सकता है यह जानकारी न होने से मानव स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव क्या पड़ेगा अन्दाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
    6- माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुटखा, दोहरा पैकिंग में प्लास्टिक व प्लास्टिक कन्टेनरों का प्रयोग प्रतिबन्धित किया गया है, इसमें यह भी कहा गया है कि दोहरा सीधे जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
     दोहरे के सन्दर्भ में देष के प्रतिश्ठित अस्पताल व डाक्टरों के विचार -
    1- टाटा कैंसर अस्पताल मुम्बई के अनुसार जौनपुर जिले में बनने व बिकने वाला खाद्य मादक पदार्थ दोहरा कैंसर का कारणकारी पदार्थ है।
    2- सर सुन्दरलाल चिकित्सालय बी0एच0यू0 वाराणसी व कैंसर विभागाध्यक्ष मल्लिका तिवारी के अनुसार प्रति वर्श जिला जौनपुर से लगभग पन्द्रह हजार लोग कैंसर का इलाज कराने के लिए बी0एच0यू0 चिकित्सालय में पंजिकरण कराते हैं।
    3- कैंसर रोग विषेशज्ञ डा0 लालबहादुर सि़द्धार्थ कहते है जौनपुर जिले में सबसे अधिक मुॅह के कैंसर के रोगियों की संख्या है जिसका प्रमुख कारण जौनपुर में बिकने वाला खाद्य मादक पदार्थ दोहरा है, मेरे द्वारा पाँच सौ से अधिक मुह के कैंसर रोगियों का इलाज किया गया है, समय रहते अगर जागरुक नहीं हुए तो दोहरा महामारी का रूप धारण कर लेगा।
    4- कैंसर सर्जन डा0 ए0के0 सिंह नारायण नर्सिंग होम जौनपुर कहते हैं दोहरा खाने से मुह का कैंसर, आँत का कैंसर, गले का कैंसर, जीभ का कैंसर, आदि कैंसर होता है, इसलिए दोहरा के निर्माण विक्रय पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगना चाहिए।
    5- जिले के कार्डियोलाजिस्ट डा0 मेहर अब्बास, डा0 अषोक कुमार त्रिपाठी व अन्य डाक्टर भी दोहरे को हानिकारक व कैंसर का कारण मानते हैं।
    6- जनविष्लेशक उ0प्र0 लखनऊ भी दोहरे को मानव स्वास्थ्य के लिए अपनी एक रिपोर्ट में हानिकारक मानते है।
     दोहरा खाने से कैंसर हो जाने के कारण हुई मौतें -

    हाल ही के दिनों में जौपुर का दोहरा खाने के कारण कैंसर हो जाने से अरुण कुमार शुक्ला हुसेनाबाद, मिन्टन सिंह  निवासी-लाइन बाजार, सन्तोष  जायसवाल  रासमण्डल (सिपाह), विनोद प्रजापति निवासी- हुसेनाबाद आदि की मृत्यु हो गयी है, पंकज सोनकर निवासी- लाइन बाजार, रामवृक्ष निवासी- सीहिपुर आदि ने मुह का सफल आपरेशन कराया है जो अब ठीक है।

     Admin and Founder 
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    Item Reviewed: दोहरा मुक्त जौनपुर अभियान में आई तेज़ी | Rating: 5 Reviewed By: S.M Masum
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